जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम ने सोमवार को हिंडौन उप कारागृह का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कारागृह में 98 बंदी निरुद्ध मिले, जबकि 4 बंदियों ने अपने प्रकरणों से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। टीम ने बंदियों से रहन-सहन, कानूनी मामलों और विधिक सहायता से संबंधित समस्याओं की जानकारी ली। साथ ही कारागृह की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। बंदियों को बताए कानूनी अधिकार और सहायता के तरीके निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरुण कुमार बेरिवाल और सचिव प्रताप सिंह मीणा ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी। पात्र बंदियों को अपने मामलों में निःशुल्क विधिक सहायता लेने की सुविधा के बारे में बताया गया। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करने के साथ ही नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 की जानकारी भी दी गई। 4 बंदियों ने रखीं अपने प्रकरणों की समस्याएं टीम के समक्ष चार बंदियों ने अपने-अपने प्रकरणों से संबंधित समस्याएं प्रस्तुत कीं। अधिकारियों ने इन मामलों के निराकरण के लिए अधिकार मित्र सुगर सिंह को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। एलएडीसी व्यवस्था की दी जानकारी बंदियों को विधिक सेवा प्राधिकरण और एलएडीसी व्यवस्था की कार्यप्रणाली के बारे में भी विस्तार से समझाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पात्र बंदियों को उनके मामलों में आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है। बैरकों की व्यवस्थाएं देखीं, रंग-रोगन के निर्देश निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कारागृह की बैरकों और अन्य आंतरिक व्यवस्थाओं का भी गहनता से जायजा लिया। बैरकों की स्थिति को व्यवस्थित करने के साथ आवश्यक रंग-रोगन करवाने के निर्देश दिए गए। मूलभूत सुविधाएं और समस्याओं के समाधान पर जोर कारागृह प्रशासन को निर्देश दिए गए कि बंदियों को नियमानुसार मूलभूत सुविधाएं और विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए। यह निरीक्षण राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों के तहत किया गया। निरीक्षण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निजी सहायक मानवेंद्र सिंह और उप कारागृह के कर्मचारी भी मौजूद रहे।