ब्यावर |नवकार भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री विजय राज महाराज ने कहा कि जीवन में सफलता का मुख्य आधार ध्यान, एकाग्रता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान केवल जानकारी नहीं देता। यह सही ढंग से जीवन जीने की कला सिखाता है। ध्यान से व्यक्ति को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य, लक्ष्य की अनुभूति होती है। आचार्यश्री ने कहा कि दुर्घटनाओं के मुख्य कारण नशा, जल्दबाजी, नींद हैं। सड़क पर नजर रखना जरूरी है। मन का एकाग्र होना जरूरी है। जीवन की यात्रा में भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जो होना है, वह होकर रहेगा। जो नहीं हुआ, वह नहीं हो सकता। उन्होंने जीवन की तुलना बहते पानी से की। कहा कि चिंता, निराशा में उलझने के बजाय ध्यान से मन को शांत रखना चाहिए। ध्यान से भ्रम दूर होता है। बुद्धि विशुद्ध बनती है। उन्होंने फरमाया कि साधना में ध्यान के साथ ज्ञान जुड़ जाए तो जीव मोक्ष के लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है। सर्वज्ञ की वाणी के श्रवण से सम्यक दर्शन की प्राप्ति संभव है। उन्होंने हर छोटे-बड़े कार्य में सजगता को सफलता की कुंजी बताया। 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रावक-श्राविकाओं के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता होगी। अहमदाबाद से आए राजस्थान स्थानकवासी संघ ने वर्ष 2027 के चातुर्मास के लिए आचार्यश्री से विनती की। कार्यक्रम का संचालन संघ महामंत्री कमल छल्लाणी ने किया।