सरकार स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, स्कूल वापसी, दाखिले के बाद बच्चों को स्कूलों में रोकने के नाम पर करोड़ों रुपए बहा रही है। लेकिन इनके लिए चलाई योजनाओं की पालना में भारी लापरवाही सामने आई है। राजस्थान में 1 से 15 साल तक के बच्चों के लिए 37 योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें से 21 योजनाओं में 2 साल में शून्य बजट खर्च किया गया। इसी तरह कॉलेज छात्राओं और महिलाओं के लिए 9 बड़ी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन सभी 9 योजनाओं में एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। सरकारी कारिंदों की बेरुखी सामने आई है। करीब एक करोड़ बच्चों, बालिकाओं, कॉलेज छात्राओं, महिलाओं के लिए 3 हजार करोड़ रुपए जारी किए। इनमें 2773 करोड़ की बच्चों के लिए चलाई योजना में बजट जारी किया गया, लेकिन इसमें से 20 प्रतिशत भी खर्च नहीं किया गया। कॉलेज छात्राओं, महिलाओं के लिए 9 योजनाओं में 153 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया लेकिन 2 साल में खर्च जीरो रहा। कैग की तरफ से इस गंभीर स्थिति का प्रतिवेदन विधानसभा को पेश किया है।