जयपुर में एक कंपनी निदेशक से उसके ही कर्मचारियों के करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। निदेशक के बीमार होने का फायदा उठाकर जालसाजी से कई फ्लैट्स बेच डाले। मानसरोवर थाने में पीड़ित कंपनी निदेशक की ओर से FIR दर्ज कर उचित जांच करने की मांग की है। जयपुर प्रेस क्लब में पीड़ित की ओर से प्रेस क्रॉफ्रेंस के जरिए पुलिस उच्चअधिकारियों से उचित जांच की गुहार लगाई है। जयपुर के सांगानेर इलाके में रहने वाले अजय सिंह की ओर से शिकायत कर उचित मांग की जांच की गई है। शिकायत में बताया- उनकी कंपनी की ओर से मानसरोवर में एक आवासीय परियोजना का संचालन किया गया था। साल-2014 से 2018 के बीच प्रोजेक्ट के करीब 40 प्रतिशत फ्लैट बुक हो चुके थे। अत्यधिक मानसिक और आर्थिक दबाव के कारण निदेशक अजय सिंह का स्वास्थ्य बिगड़ गया। मई-2024 में इलाज के लिए एक पुनर्वास केंद्र में भर्ती होना पड़ा। कंपनी निदेशक को भेजा जेल आरोप है कि निदेशक की बीमारी का फायदा उठाकर कंपनी के कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से कंपनी के बैंक अकाउंट्स, चेक बुक्स, इम्पोटेंट डिजिटल डेटा और फाइनेंसियल डॉक्यूमेंट पर काबू पा लिया। निदेशक को धोखे में रखकर सारा कामकाज अच्छे तरीके से संभालने का झांसा देते रहे। जालसाजी कर कई फ्लैट्स की केस रसीदे जारी कर सेल डीड व रजिस्ट्री करवा दी। जिनसे एडवांस लेकर फ्लैट बुकिंग की गई थी, फ्लैट उनको नहीं देकर आरोपी कर्मचारियों ने दूसरे लोगों के नाम रजिस्ट्री करवा दी। एडवांस बुकिंग अमाउंट देने वालों ने फ्लैट नहीं मिलने पर केस दर्ज करवाने पर पुलिस ने कंपनी निदेशक को अरेस्ट कर जेसी भेज दिया। ऑडिट करवाने पर खुला खेल जमानत पर जेल से बाहर आने पर अजय सिंह ने कंपनी के अकाउंट्स की ऑडिट करवाई। जिसमें कर्मचारियों के जालसाजी करने का पता चला। आरोपी कर्मचारियों ने पकड़े जाने से बचने के लिए ऑफिस से लेपटॉप, डीवीआर सहित इम्पोटेंट डॉक्यूमेंट तक गायब कर दिए। निदेशक की मांग है कि पुलिस की ओर से सही इनवेस्टिगेशन करने पर दोषी जेल के पीछे होंगे। पुलिस की ओर से फ्लैट बुकिंग वाले मेंबर्स और रजिस्ट्री कराने वाले परचेजर को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने के साथ ट्रांजेक्शन को बैंक से वेरिफाई कराने पर जालसाजी का खेल खुल जाएगा। पीड़ित की ओर से पुलिस के अलावा रेरा में भी कम्पलेन की गई है। पीड़ित की मांग है कि उसकी FIR दर्ज करने के साथ ही FSL जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।