जयपुर नगर निगम चुनाव-2026 में टिकट वितरण के बाद BJP और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों पार्टियों के 20 से ज्यादा वार्डों में बागी उम्मीदवार मैदान में हैं, जो सीधे अपनी ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को चुनौती देंगे। नाम वापसी की आखिरी तारीख से पहले बागियों से होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए दोनों दलों के सीनियर नेता डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं और नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि वोटों का बंटवारा रोका जा सके और अधिकृत उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले में मजबूती मिल सके। दरअसल, अब भाजपा-कांग्रेस के सामने बागी उम्मीदवारों की चुनौती खड़ी हो गई। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं, जो अपनी ही पार्टी का गणित बिगाड़ रहे हैं। वार्ड नंबर-6 में भाजपा की बागी संगीता बंदारा पार्टी की मुश्किल बढ़ा रही हैं। यहां भाजपा ने मंजू अग्रवाल को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस से कैलाशी देवी चुनाव मैदान में हैं। वहीं वार्ड नंबर-15 में भाजपा के बागी पंकज गोयल और तरुण गठोड़ ने पार्टी प्रत्याशी विक्रम सिंह रुदल की परेशानी बढ़ा दी है। इस वार्ड से कांग्रेस ने बद्री कुमावत को प्रत्याशी बनाया है। वार्ड 16 से भाजपा के दो बागी मैदान में उतरे भाजपा के लिए सबसे दिलचस्प स्थिति वार्ड नंबर-16 में है, जहां जयपुर भाजपा शहर अध्यक्ष अमित गोयल का निवास भी है। यहां पार्टी के निवर्तमान पार्षद दिनेश कांवट और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष महिपाल सिंह बागी होकर मैदान में उतर गए हैं। वार्ड नंबर-29 में भाजपा के बागी विक्रम सिंह अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी महादेव बागड़ा के लिए चुनौती बने हुए हैं। कई वार्डों में नाराजगी का सामना कर रही कांग्रेस कांग्रेस को भी कई वार्डोंं में अपनों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड नंबर-50 में टिकट के दावेदार रहे विक्रम वाल्मीकि बागी होकर मैदान में हैं, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद चावला की मुश्किल बढ़ सकती है। वार्ड नंबर-78 में कांग्रेस के बागी राजेश कुमावत चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि वार्ड नंबर-84 में लंबे समय से टिकट की मांग कर रहे हरीश बैरवा टिकट नहीं मिलने के बाद बागी होकर मैदान में उतर गए हैं। त्रिकोणीय मुकाबले के पेंच में फंसी भाजपा-कांग्रेस वार्ड नंबर-77 में भाजपा के बागी रमेश सैनी ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है, जो भाजपा प्रत्याशी प्रेम कुमार के लिए चुनौती बन सकते हैं। वार्ड नंबर-81 में भाजपा की बागी स्वाति प्रणामी चुनावी मैदान में हैं। इस वार्ड में कांग्रेस से दीपक हर्ष भी मैदान में हैं, ऐसे में यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। वार्ड नंबर-86 में भाजपा की बागी आशा अपनी ही पार्टी की प्रत्याशी उषा टाटीवाल की परेशानी बढ़ा रही हैं। भाजपा-कांग्रेस के गणित पर बागी बिगाड़ रहे समीकरण वार्ड नंबर-88 में भाजपा से बागी होकर अल्पना अग्रवाल चुनाव मैदान में हैं। वार्ड नंबर-90 में बागी पवन यादव ने नामांकन दाखिल किया है, जिससे भाजपा प्रत्याशी सरोज कंवर के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। वार्ड नंबर-101 में भाजपा से बागी मनोज मुद्गल चुनाव मैदान में हैं और उनकी मौजूदगी से भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशी का गणित भी प्रभावित हो सकता है। दोनों प्रमुख दलों को बागियों की चुनौती वार्ड नंबर-104 में दोनों प्रमुख दलों को बागियों की चुनौती मिल रही है। भाजपा के अरुण गठोड़ अपनी पार्टी के प्रत्याशी ज्ञानचंद खंडेलवाल की मुश्किल बढ़ा रहे हैं, वहीं कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ रहे सुनील अपनी पार्टी के प्रत्याशी अब्दुल लतीफ के लिए चुनौती बने हुए हैं। इसी तरह वार्ड नंबर-109 में कांग्रेस के बागी इकराम और रईस खान मैदान में हैं, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अयूब के वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका है। कांग्रेस-भाजपा के बागी बढ़ा रहे दोनों पार्टियों की मुश्किलें वार्ड नंबर-103 में कांग्रेस से बागी अजहरुद्दीन चुनाव मैदान में हैं और वे कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद हनीफ के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। वार्ड नंबर-110 में कांग्रेस के बागी अकबर पठान मैदान में हैं, जिनकी मौजूदगी कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मेठी के लिए चुनौती बन सकती है। वार्ड नंबर-113 में भाजपा के बागी मुस्ताक अहमद अपनी पार्टी के प्रत्याशी फरीदुद्दीन की मुश्किल बढ़ा रहे हैं, जबकि वार्ड नंबर-114 में कांग्रेस से बागी होकर फारुख चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। वार्ड नंबर-136 में कांग्रेस के निवर्तमान डिप्टी मेयर असलम फारुखी की पत्नी बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं वार्ड नंबर-146 में कांग्रेस की बागी शबनम खान चुनावी मैदान में हैं। वार्ड नंबर-147 में कांग्रेस के बागी वईस और जुनैद ने भी मैदान संभाल लिया है। इन बागियों ने दोनों प्रमुख दलों की चुनावी रणनीति बिगाड़ दी है। अब सबसे बड़ी चुनौती नाम वापसी की आखिरी तारीख से पहले नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने की है। अगर दोनों पार्टियां अपने बागियों को नाम वापस लेने के लिए राजी नहीं कर पाई तो कई वार्डों में मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ अधिकृत प्रत्याशियों के लिए अपनों से ही बड़ी चुनौती बन सकता है।