जैसलमेर नगर निकाय चुनाव को लेकर नामांकन पत्रों की जांच का काम पूरा हो गया है। चुनाव अधिकारी द्वारा की गई सघन जांच के बाद कुल 436 नामांकनों में से 151 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। इसके साथ ही अब चुनावी मैदान में 285 उम्मीदवार बाकी रह गए हैं। RLP भी लड़ रही चुनाव जांच के दौरान कई आवेदनों में शपथ पत्र, पढ़ाई और संपत्ति के कागजों में कमियां पाई गईं। वहीं कई उम्मीदवार पार्टियों का आधिकारिक सिंबल जमा नहीं कर पाए। स्क्रूटनी के बाद शहर के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। बीजेपी और कांग्रेस के 45-45 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के 4 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार सबसे ज्यादा 191 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला काफी रोचक हो गया है। 151 आवेदन हुए खारिज जैसलमेर शहर के वार्डों में चुनावी सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुंच गई है। नामांकन फॉर्म की जांच के बाद चुनावी तस्वीर बहुत हद तक साफ हो चुकी है। चुनाव प्रशासन की तरफ से सभी फॉर्म्स की बारीकी से जांच की गई थी। इस दौरान जिन उम्मीदवारों के कागजात पूरे नहीं थे या जिनमें कोई गलती थी, उन्हें खारिज कर दिया गया। रद्द हुए 151 फॉर्म्स में से ज्यादातर ऐसे प्रत्याशी थे, जिन्होंने मुख्य उम्मीदवारों के बैकअप या डमी के तौर पर पर्चा भरा था। पार्टी से टिकट और सिंबल न मिलने की वजह से नियम के मुताबिक इनके फॉर्म रद्द कर दिए गए। निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं गणित इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती निर्दलीय प्रत्याशी पेश कर रहे हैं। 191 निर्दलीयों के मैदान में होने से कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के समीकरण बिगड़ने का डर है। कई वार्डों में बागी उम्मीदवार भी निर्दलीय के रूप में ताल ठोक रहे हैं। ऐसे में मुकाबला अब आमने-सामने का न रहकर त्रिकोणीय और बहुकोणीय हो गया है। नाम वापसी पर टिकी नजरें राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों मुख्य पार्टियां अब अपने-अपने बागियों और निर्दलीयों को मनाने में जुट गई हैं। नाम वापस लेने की आखिरी तारीख तक कई निर्दलीय अपना नामांकन उठा सकते हैं। इसके बाद ही चुनाव की असली और अंतिम तस्वीर साफ होगी। शहर के हर वार्ड में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं और प्रत्याशी घर-घर जाकर प्रचार में जुट गए हैं।