जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों में मतदान के बाद अब 44 वार्डों के 143 प्रत्याशियों के नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे। वार्ड 23 से कांग्रेस प्रत्याशी लखमों के निर्विरोध निर्वाचन के बाद बाकी वार्डों की EVM में प्रत्याशियों का भाग्य कैद है। स्पष्ट बहुमत की स्थिति नहीं दिखने से भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों के चुनावी रण में मतदान के बाद अब राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। वार्ड 23 से कांग्रेस प्रत्याशी लखमों के निर्विरोध निर्वाचन के बाद शेष 44 वार्डों के 143 प्रत्याशियों का भाग्य EVM में कैद है। थ्री लेयर सुरक्षा में प्रत्याशी सेंधमारी से बचने के लिए भाजपा ने अपने पार्षदों को तीन लेयर की कड़ी सुरक्षा में अलग-अलग सुरक्षित ठिकानों पर ठहराया है। वहीं कांग्रेस में भी जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर और पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव ने अलग-अलग बाड़ेबंदी कर रखी है। कांग्रेस ने की अलग बाड़ेबंदी पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति के तहत कांग्रेस खेमे में अलग-अलग बाड़ेबंदी देखने को मिल रही है। जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर और पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव अपने-अपने समर्थकों के साथ अलग-अलग ठिकानों पर हैं। रूपाराम गुट के पार्षदों को एक सुरक्षित रिसॉर्ट में ठहराया गया है, जबकि फकीर खेमे के पार्षद जैसलमेर के ही एक ठिकाने पर डेरा डाले हुए हैं। नेताओं की यह अलग-अलग बाड़ेबंदी स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। 14 सितंबर को पीजी कॉलेज में EVM से खुलेगा भाग्य सोमवार, 14 सितंबर को सुबह से पीजी कॉलेज में बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम में कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना शुरू होगी। इस दिन तय हो जाएगा कि 44 वार्डों के 143 प्रत्याशियों में से कौन पार्षद की कुर्सी पर बैठेगा और किस दल का बोर्ड बनेगा। परिणाम आने के बाद हारे हुए प्रत्याशी बाड़ेबंदी से मुक्त हो जाएंगे, जबकि जीते हुए पार्षदों को तुरंत प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। इसके बाद बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति तय होगी। पिछली बार के धोखे से सबक, भाजपा रखेगी तीन लेयर की सुरक्षा पिछली बार बोर्ड गठन के दौरान हुए राजनीतिक धोखे और किरकिरी से सबक लेते हुए इस बार भाजपा पूरी तरह सावधानी बरत रही है। पार्टी ने इस बार अपने पार्षदों को किसी एक स्थान पर रखने के बजाय तीन अलग-अलग सुरक्षित ठिकानों पर तीन लेयर की कड़ी सुरक्षा में ठहराया है। विपक्षी दलों की सेंधमारी और जोड़-तोड़ की राजनीति को नाकाम करने के लिए यह रणनीति तैयार की गई है, ताकि परिणाम आने तक पार्षदों की एकजुटता बरकरार रखी जा सके।