कोटा में निकाय चुनाव में मतदान खत्म होने के साथ ही अब भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों को संभालना शुरू कर दिया है। दोनों दल प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम में जुटे हैं। चुनाव परिणाम आने तक प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी किए जाने की चर्चा है। कांग्रेस ने सांगोद नगर पालिका में चुनाव लड़े प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी की है। 34 प्रत्याशियों को जैसलमेर शिफ्ट किया हैं। बाड़ाबंदी का देहात जिलाध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने मोर्चा संभाल रखा है। बाड़ाबंदी में महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं। वार्ड 4 की प्रत्याशी दीप कंवर के साथ 1 साल का बेटा व एक अन्य महिला प्रत्याशी उमा शेरवानी के साथ भी 1 साल का बेटा है। जबकि वार्ड 3 से पूजा नायक के साथ डेढ़ साल का बेटा है। इधर कोटा नगर निगम में मतदान खत्म होने के बाद दोनों ही दल बाड़ाबंदी से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रत्याशियों को सिर्फ मतदान के बाद फीडबैक और चुनावी एनालिसिस के लिए बुलाया गया है। मतदान के बाद शुक्रवार रात दोनों दलों ने अपने प्रत्याशियों को अलग-अलग स्थानों पर बुलाया। भाजपा के कुछ प्रत्याशियों को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने कार्यालय पर बुलाया, जबकि कुछ प्रत्याशियों को दादाबाड़ी क्षेत्र में एकत्र किया गया। यहां प्रत्याशियों से मतदान प्रतिशत, बूथवार स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और चुनावी माहौल को लेकर फीडबैक लिया गया। इसी तरह कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशियों को अलग-अलग स्थानों पर बुलाया। लाडपुरा क्षेत्र के प्रत्याशियों को कांग्रेस नेता नईमुद्दीन गुड्डू के घर पर बुलाया, जबकि कोटा दक्षिण क्षेत्र के प्रत्याशियों को शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने आरकेपुरम में इकट्ठा किया किया। दोनों दलों में प्रत्याशियों से उनके वार्ड में मतदान की स्थिति और जीत-हार के संभावित समीकरणों को लेकर चर्चा की गई। प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम सूत्रों के मुताबिक, मतदान के बाद अब दोनों पार्टियां अपने प्रत्याशियों को परिणाम आने तक सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रही हैं। नगर निगम चुनाव का परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछली बार कोटा में दोनों नगर निगमों में कांग्रेस के बोर्ड बने थे। ऐसे में यदि इस बार भाजपा नगर निगम में बोर्ड बनाने में सफल रहती है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा। वहीं भाजपा के लिए यह सत्ता में वापसी के तौर पर देखा जाएगा। यही वजह है कि मतदान के बाद से ही दोनों दल अपने प्रत्याशियों को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं।