जैसलमेर में मानसून की बेरुखी के बीच तेज धूप और उमस ने लोगों के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। 37.3 डिग्री तापमान के बीच लंबे समय से बारिश नहीं होने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है और बाजरा, ग्वार व तिलहन जैसी खरीफ फसलें मुरझाने लगी हैं। किसानों का कहना है कि अगले दो-तीन दिन में बारिश नहीं हुई तो फसलें सूखने का खतरा है, जिससे अब तक की मेहनत और खर्च पर पानी फिर सकता है। भादों में जेठ-आषाढ़ जैसी गर्मी से दोपहर में बाजार-सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है और पंखे-कूलर भी उमस से राहत नहीं दे पा रहे। ऐसे में किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजर आसमान पर टिकी है और बारिश का इंतजार है। बारिश नहीं हुई तो फसलें तबाह होने का खतरा जिले में लंबे समय से बारिश का सिलसिला थमा हुआ है। आमतौर पर भाद्रपद में होने वाली अच्छी बारिश खरीफ फसलों के लिए संजीवनी का काम करती है, लेकिन इस बार बारिश के बजाय तेज धूप पड़ रही है। इससे खेतों की जमीन में मौजूद नमी भी खत्म होती जा रही है। किसानों के अनुसार, बाजरा, ग्वार और तिलहन जैसी फसलों को इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। किसानों का कहना है कि अगर अगले दो-तीन दिन में बारिश नहीं हुई, तो फसलें पूरी तरह सूख सकती हैं। ऐसे में किसानों की अब तक की मेहनत और फसल पर किया गया खर्च दोनों डूबने का खतरा है। मई-जून जैसी गर्मी, दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा मौसम के बदले मिजाज का असर आम जनजीवन पर भी दिखाई दे रहा है। दोपहर होते-होते बाजारों और सड़कों पर आवाजाही कम हो जाती है। उमस और तेज गर्मी के कारण पंखे और कूलर भी राहत नहीं दे पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस साल सितंबर में मानसूनी ब्रेक के कारण जेठ-आषाढ़ जैसी गर्मी महसूस हो रही है। अब किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी की नजर आसमान पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि जल्द बादल बरसेंगे और पश्चिमी राजस्थान के थार इलाके को सूखे के संकट से राहत मिलेगी।