झालावाड़ में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर मंगलवार को जिलेभर में 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान के तहत विधिक साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रम हुए। इस दौरान स्कूली बच्चों को बाल शोषण, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श, बाल अपहरण, तस्करी और बाल श्रम से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल मंगलपुरा, झालावाड़ में हुए कार्यक्रम में जिला एवं सेशन जज आलोक सुरोलिया ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें 'स्ट्रेंजर डेंजर' यानी अजनबियों से खतरे के प्रति जागरूक रहना जरूरी है। उन्होंने बच्चों को 'नो, गो, टेल' का सुरक्षा मंत्र बताया। जज सुरोलिया ने समझाया कि खतरा महसूस होने पर 'नो' यानी ना कहो, 'गो' यानी खतरे वाली जगह से दूर भागो और 'टेल' यानी अपने माता-पिता, शिक्षक या पुलिस को तुरंत बताओ। उन्होंने कहा कि यदि कोई अनजान व्यक्ति खाने की चीज, उपहार देने या किसी बहाने से बच्चे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करे, तो बच्चे बिना डरे साफ मना करें और जरूरत पड़ने पर जोर से आवाज लगाएं। खतरे की स्थिति में तुरंत भीड़भाड़ वाली या सुरक्षित जगह पर पहुंचना चाहिए। बच्चों को यह भी बताया गया कि अपने साथ हुई किसी भी डरावनी या असामान्य घटना को छिपाना नहीं चाहिए। उन्होंने संकट की स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सहायता लेने के बारे में जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दुर्व्यवहार का सामना कर रहे बच्चों को मुफ्त कानूनी सहायता, सुरक्षित आश्रय, परामर्श और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के बारे में भी बताया गया। विद्यार्थियों को पोक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत बच्चों को मिलने वाले कानूनी अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी गई। अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज नरेन्द्र कुमार मीणा ने कहा कि इस अभियान का मकसद बच्चों को अपहरण, बाल तस्करी और बाल श्रम जैसी घटनाओं से बचाना है। हर बच्चे को सुरक्षा, गरिमा और शिक्षा का अधिकार है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रोहित सक्सेना ने देव संस्कृति माध्यमिक स्कूल में आयोजित जागरूकता शिविर में विद्यार्थियों को ‘स्ट्रेंजर डेंजर’ एवं अभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त जिले में पदस्थापित सभी न्यायिक अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्राधिकार के विद्यालयों में विद्यार्थियों को अजनबियों से संभावित खतरे एवं सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक किया।