झालावाड़ शहर की सड़कों पर घूम रहा बेसहारा गोवंश अब सिर्फ यातायात में बाधा नहीं, बल्कि लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। गत मंगलवार अस्पताल के गेट पर 80 वर्षीय महिला पुष्पा बाई पर गोवंश ने हमला कर दिया। घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दो दिन बाद शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। इससे पहले भी गोवंश और आवारा कुत्तों के हमलों तथा सड़क हादसों में कई लोग जान गंवा चुके हैं। जिला प्रशासन के बार-बार निर्देश और बैठकों के बावजूद शहर की सड़कों से बेसहारा पशुओं को हटाने का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। गढ़ परिसर से मामा भानेज चौराहे तक रात में दिखा जमावड़ा बीती रात शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की स्थिति का जायजा लिया गया। गढ़ परिसर से लेकर मामा भानेज चौराहे तक करीब डेढ़ किलोमीटर के सड़क मार्ग पर बड़ी संख्या में गोवंश सड़क पर बैठे और घूमते नजर आए। कई जगहों पर सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण वाहन सवारों को इन पशुओं को देख पाना भी मुश्किल हो रहा था। मंगलपुरा, मामा भानेज चौराहा, जयराज पार्क और अस्पताल के सामने भी दिन-रात गोवंश का जमावड़ा आम है। यही स्थिति नेशनल हाईवे-52 पर भी बनी हुई है। अंधेरे में बाइक सवारों के लिए बढ़ा खतरा सड़क पर बैठे काले या गहरे रंग के गोवंश रात के अंधेरे में वाहन सवारों को देर से दिखाई देते हैं। अचानक सामने आए पशुओं को बचाने के प्रयास में कई बाइक सवार अनियंत्रित होकर गिरकर चोटिल हो चुके हैं। शहर और आसपास के क्षेत्रों में गोवंश के कारण हुए कई सड़क हादसों में लोगों की मौत भी हो चुकी है। गोवंश के साथ घोड़े और आवारा कुत्ते भी सड़कों पर आमजन के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। अस्पताल गेट पर 80 वर्षीय महिला पर हमला, दो दिन बाद मौत गत मंगलवार खानपुर कस्बे से बीमारी का इलाज कराने झालावाड़ अस्पताल पहुंची 80 वर्षीय पुष्पा बाई अस्पताल के अंदर जाने के लिए गेट पर पहुंची ही थीं कि एक गोवंश ने उन पर हमला कर दिया। हमले में महिला घायल हो गई। गार्ड और मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने उनकी मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। यहां उनका दो दिन तक उपचार चला, लेकिन शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। महिला के पुत्र ने अस्पताल में पोस्टमार्टम की कार्रवाई से इनकार कर दिया और शव लेकर चले गए। आवारा कुत्तों ने भी ली जान शहर में समस्या सिर्फ गोवंश तक सीमित नहीं है। बालजी की छतरी के सामने अस्थाई डेरे लगाकर रहने वाले परिवारों की एक बेटी पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया था। कुत्तों के हमले में बच्ची की मौत हो गई थी। खानपुर सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में भी आवारा कुत्तों के कारण बच्चों के शिकार होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। गोवंश और बकरी को बचाने में तीन लोग घायल ग्रामीण इलाकों में भी सड़क पर पशुओं की मौजूदगी लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। 23 अगस्त को रामदयाल मेघवाल, सचिन राठौर और मध्यप्रदेश निवासी मांगीलाल भील गोवंश और बकरी को बचाने के दौरान घायल हो गए। तीनों को झालावाड़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बेसहारा पशुओं की समस्या शहर के साथ ग्रामीण सड़कों पर भी हादसों का कारण बन रही है। बैठकों में चर्चा, कार्रवाई के बाद फिर वही स्थिति बेसहारा गोवंश को सड़कों से हटाने को लेकर जिला प्रशासन की बैठकों में कई बार चर्चा हो चुकी है। नगर परिषद ने भी गोवंश को सड़कों से हटाने के लिए कार्रवाई की, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी साबित नहीं हुई। कुछ समय बाद पशु फिर सड़कों पर नजर आने लगे। ऐसे में प्रशासन और नगर परिषद की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बार-बार अभियान चलने के बावजूद समस्या खत्म क्यों नहीं हो रही। जागरूक नागरिकों ने मांगा स्थायी समाधान शहर के जागरूक नागरिक ललित शर्मा, सौरभ, पुष्पेंद्र शर्मा और राधेश्याम सोलंकी सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से बेसहारा पशुओं के खिलाफ प्रभावी और स्थायी कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि हादसों के बाद कुछ समय के लिए कार्रवाई करने के बजाय गोवंश को सड़कों से स्थायी रूप से हटाने, सुरक्षित स्थान पर रखने और उनकी निगरानी की व्यवस्था की जानी चाहिए। सवाल: आखिर कब खत्म होगा सड़कों पर पशुओं का खतरा? झालावाड़ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गृह जिला रहा है। इसके बावजूद शहर लंबे समय से बेसहारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है। सड़क हादसों, अस्पताल के सामने हुए हमले और पशुओं के कारण लोगों के घायल होने की घटनाओं के बाद अब जरूरत केवल बैठकों और अस्थायी अभियानों की नहीं, बल्कि ऐसी ठोस व्यवस्था की है जिससे सड़कों पर गोवंश, आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं की मौजूदगी से आमजन की जान खतरे में न पड़े।