उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेशों की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नगर परिषद झुंझुनूं और उपखंड अधिकारी (एसडीएम) झुंझुनूं को अंतिम अवसर दिया है। आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने स्पष्ट किया है कि 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत तक आयोग के आदेशों की पूरी पालना नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा-72 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित उपभोक्ता मामलों का शीघ्र निस्तारण करने और आयोग के आदेशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल की गई है। इसके तहत पक्षकारों को न्याय टेबल पर बैठकर आपसी सहमति से विवादों का स्थाई समाधान करने का अवसर दिया जा रहा है। पीड़ित उपभोक्ता अपनी समस्या सीधे आयोग के सामने रख सकेंगे और संबंधित विभागों से 72 घंटे के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट तलब की जाएगी। फ्लैट बना कर उपभोक्ताओं को नहीं दिए उपभोक्ता आयोग के समक्ष मंड्रेला रोड स्थित मुख्यमंत्री जन सहभागिता आवास योजना से जुड़े कई मामलों का निर्णय पहले ही किया जा चुका है। आयोग ने माना था कि समय पर फ्लैट बनाकर उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ। नगर परिषद ने आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक अपील की, लेकिन वहां भी कोई राहत नहीं मिली और उपभोक्ता आयोग का निर्णय यथावत रहा। इसके बाद आयोग ने आदेश की पालना के लिए नगर परिषद को समय दिया था, जिसकी अंतिम समय-सीमा अब 12 सितंबर तय की गई है। आदेश पालन का आश्वासन आयोग ने बताया कि 13 मार्च को जिला कलेक्टर, एडीएम एवं नगर परिषद प्रशासक, तत्कालीन एसडीएम हवाई सिंह यादव, तत्कालीन आयुक्त कौशल्या बिश्नोई, तहसीलदार महेंद्र मुंड सहित अन्य अधिकारी आयोग के समक्ष उपस्थित हुए थे। उस दौरान अधिकारियों ने लोक अदालत की भावना के अनुरूप उपभोक्ताओं को अवार्ड राशि का भुगतान करने तथा आयोग के आदेशों की अक्षरशः पालना करने का आश्वासन दिया था। आयोग ने भी अधिकारियों को राष्ट्रीय और राज्य उपभोक्ता आयोग के अंतिम निर्णयों के अनुसार आदेशों को समयबद्ध लागू करने के निर्देश दिए थे। उपभोक्ताओं ने नगर परिषद के पक्ष में किए अधिकार समर्पित आयोग के अनुसार कई पीड़ित उपभोक्ताओं ने अपने आवंटित फ्लैटों के सभी विधिक अधिकार नगर परिषद के पक्ष में समर्पित करने संबंधी शपथ पत्र आयोग में प्रस्तुत किए हैं। इसके बाद नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर संबंधित उपभोक्ताओं को अवार्ड राशि का भुगतान कराया जा रहा है। जिन फ्लैटों के अधिकार नगर परिषद को सौंपे जा चुके हैं, उन्हें बेचने, नीलाम करने या अन्य वैधानिक कार्रवाई करने का अधिकार अब नगर परिषद के पास रहेगा। अब तक पूरी नहीं हुई आदेश की पालना आयोग ने कहा कि जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा मांगा गया समय अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद आयोग के आदेशों की पूर्ण पालना नहीं हुई है। इसे देखते हुए न्यायहित में 12 सितंबर तक का अंतिम अवसर दिया गया है। यदि इस अवधि में आदेशों की पालना नहीं हुई तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा-72 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा-72 के तहत आयोग के आदेश की अवहेलना करने पर दोषी अधिकारी को एक लाख रुपये तक का जुर्माना, तीन वर्ष तक का कारावास, अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं।