प्रयास संस्थान चूरू की तरफ से ओसवाल भवन में साहित्यकार विजयदान देथा बिज्जी के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हुए दो दिवसीय शताब्दी समारोह का समापन मंगलवार शाम हुआ। अंतिम सत्र की अध्यक्षता बिज्जी की कथाओं के चर्चित अनुवादक कैलाश कबीर ने की। कैलाश कबीर ने कहा कि बिज्जी की कथाओं का मूल आधार लोक है, लेकिन उन्होंने इसे आधुनिक संदर्भों में ढालकर कालजयी साहित्य का रूप दिया। उनकी कहानियां आम आदमी और स्त्री के पक्ष को मजबूती से उजागर करती है। मुख्य अतिथि पदम मेहता ने बिज्जी को राजस्थानी भाषा को अंतरराष्ट्रीय मंच देने वाली ऐतिहासिक कड़ी बताया। विशिष्ट अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने बिज्जी की लेखन से लेकर प्रकाशन और अनुवाद तक की सजगता के संस्मरण साझा किए। डॉ. भरत ओला ने उनकी कहानियों को मानवीय संवेदनाओं का दर्पण बताया। इस मौके पर उपस्थित साहित्यकारों ने राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने, राजस्थान की राजभाषा बनाने, बिज्जी पर डाक टिकट जारी करने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव लेकर केंद्र व राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण ने आभार जताया। सोमवार रात वरिष्ठ गीतकार किशन दाधीच की अध्यक्षता में हुई कवि गोष्ठी में देर रात तक श्रोता डटे रहे। गोष्ठी में बनवारी शर्मा खामोश, सुरेंद्र पारीक रोहित, मख्दूम बिसाऊवी, डॉ. अरुण शहेरिया ताइर, शंकर सिंह राजपुरोहित, राजूराम बिजारिणया, इदरीश खत्री राज, देवीलाल महिया, आशीष गौतम आशु, दीपक कामिल, मनोज चारण, सत्येंद्र चारण, तंजीम बानो तथा मुकेश मनमौजी ने गीत, गजल और कविताओं की प्रस्तुति दी। संचालन श्रीगंगानगर के डॉ. संदेश त्यागी ने किया। समापन से पूर्व हुए दो वैचारिक सत्रों में बिज्जी के साहित्य के विविध आयामों पर चर्चा हुई। चतुर्थ सत्र (बिज्जी का लेखन एवं फिल्मांकन-मंचन) : अध्यक्षता अंबिकादत्त चतुर्वेदी ने की। प्रेमचंद गांधी, कमल रंगा, सत्यदीप, हरीश बी. शर्मा, तसनीम खान, डॉ. कालूराम परिहार, एम.आई. जाहिर व राजेंद्र सिंह शेखावत ने बिज्जी की कहानियों के सिनेमा व मंचन पर विचार रखे। संचालन शंकर सिंह राजपुरोहित ने किया। पंचम सत्र (बिज्जी की भाषा): मीठेश निर्मोही की अध्यक्षता में हुए सत्र में दिनेश पंचाल, रामेसर गोदारा, डॉ. सुरेश सालवी, विनोद सारस्वत, मनोज कुमार स्वामी, गौरीशंकर निम्मिवाल, किशोर कुमार निर्वाण व कमल रंगा ने लोकभाषा के रचनात्मक प्रयोग को रेखांकित किया। संचालन डॉ. मदन गोपाल लड्ढा ने किया। उदयवीर शर्मा को कन्हैयालाल रतनलाल पारख पुरस्कार मिला: प्रयास संस्थान पुरस्कार के चयनित साहित्याकारों का धनंजया अमरावत, फारूक आफरीदी और डॉ. रामकुमार घोटड़ ने सम्मान किया। बिसाऊ के उदयवीर शर्मा को कन्हैयालाल रतनलाल पारख पुरस्कार, नगरश्री ट्रस्ट चूरू को श्याम गोइन्का संस्था सम्मान, हनुमान बरोड़ को मोहन आलोक साहित्य सम्मान, भंवरलाल भ्रमर को बैजनाथ पंवार पुरस्कार, डॉ. चांदकौर जोशी को सावित्री चौधरी खूम सिंह पुरस्कार व सत्येंद्र चारण को दुर्गेश युवा पुरस्कार से नवाजा गया। संचालन कमल शर्मा ने किया।कार्यक्रम में सहयोगी संस्थाओं व सहयोगियों यथा ओसवाल भवन समिति, विजयदान देथा कॉलेज बोरुंदा, निसार अहमद खान, सहीराम पूनिया, जितेंद्र चौधरी, चंदगी दूत, ओमप्रकाश रणवा, भंवरलाल कस्वां, पवन कस्वां, बनवारी लाल शर्मा साहित्य समिति, नवल केड़िया (कोलकाता), केसरी सिंह बारहठ स्मृति संस्थान, अजय रमेश जांगिड़, परमेश्वर लाल तिवाड़ी व योगेश सोनी का अभिनंदन किया गया।