लघु बृज के नाम से प्रसिद्ध करौली के प्रसिद्ध मदन मोहन मंदिर, गोपालजी मंदिर, गोविंद देवजी और नवल बिहारी मंदिर में नंदोत्सव मनाया गया। कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन शनिवार को इन मंदिरों में यह आयोजन हुआ। शहर के पूजनीय मदन मोहन मंदिर में राजभोग आरती के बाद कृष्ण जन्म की बधाई के रूप में 'छाक' लुटाने की परंपरा है। करौली में नंदोत्सव को 'दचका दौनद' भी कहते हैं। इस परंपरा का पालन किया गया। पूर्व राजपरिवार के सदस्य और मंदिर सोल ट्रस्टी के पुत्र युवराज विश्वास्वत पाल और मंदिर के गुसाईं ने नंद बाबा बनकर भक्तों को भगवान का प्रसाद बांटा। इस मौके पर ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। भगवान का प्रसाद लूटने के लिए भक्तों में होड़ लग गई। कई भक्त एक-दूसरे से मांगकर भी प्रसाद लेते दिखे। 'छाक' में भगवान के प्रसाद के साथ रुपए, पैसे, मौसमी फल और सब्जियां भक्तों पर लुटाई जाती हैं। शहर के लगभग सभी कृष्ण मंदिरों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। 'छाक' लुटाने के तुरंत बाद भक्तों पर रंग मिली हल्दी, दही और पानी की बौछार डाली जाती है। इसमें सभी कृष्ण भक्त भीगने का आनंद लेते हैं और इसी रंग में भीगते हुए प्रसाद लूटते हैं। इसे 'लाला की छीछी' भी कहा जाता है। इस दौरान मंदिर सोल ट्रस्ट और पूर्व राज परिवार के सदस्य ने बताया कि भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में 'छाक' लुटाने की यह पुरानी परंपरा है, जिसका आज भी पालन किया जा रहा है।