निकाय चुनाव को लेकर कोटा में आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब कांग्रेस कार्यकर्ता लिस्टों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस लिस्ट जारी करने के बजाय दूसरे विकल्प पर विचार कर रही है। पूरी संभावना है कि कांग्रेस की तरफ से लिस्ट जारी न होकर सीधे रिटर्निंग अधिकारी को लिस्ट सौंपी जाए और एक साथ सिंबल अलॉट किए जाएं। पहले लिस्ट 29 अगस्त को आने की पूरी संभावना थी। लेकिन कोटा में प्रत्याशियों के चयन को लेकर पेंच फंसा हुआ है। कोटा में कांग्रेस में अलग-अलग गुट बने हुए हैं। जिसके चलते प्रत्याशियों के चयन को लेकर असंमजंस की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस के सामने लिस्ट जारी होने के बाद बगावत की आशंका स्थिति यह है कि कोटा में अलग-अलग गुटों की तरफ से भी नाम गए हैं, पैनल भेजे जाने की बात कही जा रही है कि पैनल भेजे नहीं गए बल्कि अलग-अलग गुटों से नाम गए हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने लिस्ट जारी होने के बाद बगावत की आशंका बनी हुई है। इसी बगावत को रोकने के लिए अब कांग्रेस इस फॉर्मूले पर काम कर रही है। जयपुर में कांग्रेस पदाधिकारियों के बीच हुई चर्चा के बाद अभी तक यही बात सामने आ रही है कि प्रत्याशियों को सीधे कॉल किया जाएगा और उनसे नामाकंन भरवा लिया जाएगा। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी को सीधे सिंबल सौंपे जाएंगे। कोटा जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज से जब इस बारे में जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि अभी पार्टी स्तर पर विचार किया जा रहा है कि आगे क्या प्रक्रिया रहनी है। विवाद के चलते रद्द हुई बैठक, अब सर्वसम्मति पर जोर गुरुवार को टिकटों पर चर्चा के लिए संगठन की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन नेताओं के बीच खींचतान और विवाद की आशंका को देखते हुए इसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद प्रत्याशियों की घोषणा जयपुर से करने का फैसला लिया गया। प्रदेश नेतृत्व चाहता है कि सभी स्थानीय गुट एक राय होकर बीच का रास्ता निकालें। जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट देने की रणनीति कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रत्याशियों का चयन पूरी तरह से पेशेवर सर्वे के आधार पर किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने स्तर पर वार्डवार सर्वे का काम पूरा कर लिया है। खास बात यह है कि जिन स्थानीय नेताओं के सुझाव पर नाम फाइनल होंगे, चुनाव में संबंधित वार्ड से प्रत्याशी को जिताने की पूरी जिम्मेदारी भी उन्हीं नेताओं की होगी।