उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में एकेडमिक काउंसिल की बैठक मंगलवार को अतिथि गृह सभागार में कुलगुरु प्रोफेसर कैलाश डागा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक मानकों को मजबूत करने और नवाचारों को अपनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय हुए। देसी और विदेशी भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी में स्वतंत्र भाषा केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इस केंद्र से विभिन्न भाषाओं के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को लाभ मिलेगा। सिक्किम के छात्र यहां ले सकेंगे उच्च शिक्षा बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड स्किल एजुकेशन सिक्किम के वाइस चेयरमैन की ओर से मिले पत्र के आधार पर सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए स्वीकृति दी गई। इससे सिक्किम बोर्ड से पास हुए छात्र यहां आकर आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। साथ ही महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड उज्जैन द्वारा कक्षा 10वीं-12वीं की परीक्षा पास कर चुके छात्रों को उच्च अध्ययन के लिए मान्य किया गया। इसके अलावा मास्टर ऑफ आर्ट्स (एमए) इन हिंदू स्टडीज पाठ्यक्रम को भी स्वीकृति दी गई। माइग्रेशन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश यूजीसी के नए नियमों के अनुसार- एक छात्र एक सत्र में नियमित यूनिवर्सिटी और एक ओपन विश्वविद्यालय की डिग्री एक साथ अध्ययन कर सकता है। हालांकि माइग्रेशन प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। इस संबंध में काउंसिल ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। अब ऐसे छात्रों को माइग्रेशन प्राप्त करने के लिए संबंधित यूनिवर्सिटी से एनओसी लेनी होगी। उसे संबंधित कॉलेज या विश्वविद्यालय में जमा करना होगा। इसके बाद यूनिवर्सिटी के लागू नियमों के अनुसार एनरोलमेंट की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही निर्णय लिया कि प्रदेश के अन्य राज्य द्वारा सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के साथ शैक्षणिक आदान-प्रदान करने के लिए एमओयू किया जा सकेगा। बैठक में रजिस्ट्रार डॉ बीसी गर्ग, वित्त नियंत्रक सुरेश जैन, परीक्षा नियंत्रक डॉ मुकेश बारबर, आर्ट्स कॉलेज अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा, साइंस कॉलेज अधिष्ठाता प्रोफेसर एमके जैन, कॉमर्स कॉलेज अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भानावत आदि मौजूद थे।