पाली नगर निगम के 65 वार्डों से इस बार भाजपा के 64 और कांग्रेस के 59 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। सभी जोर-शोर से चुनावी प्रचार-प्रसार में जुटे है। दोनों ही पार्टियों के कई मजबूत प्रत्याशी जो अपनी जीत लगभग तय मान रहे है और खुद को निगम के महापौर के रूप में प्रजेंट कर रहे है और अभी लॉबिंग भी शुरू कर दी है। कईयों के सिर पर बड़े नेताओं का हाथ है और वे भी उन्हें इसी रूप में पेश कर रहे है ताकि बोर्ड बनाने का जब समय आए तो वे इन प्रत्याशियों में से किसी को महापौर के रूप में पेश कर सके। आईए जानते है दोनों ही पार्टियों के कौनसे तीन प्रमुख नाम है जो खुद को महापौर के तौर पर देखते है। भाजपा का नारा इस बार 50 पार चर्चा में है। वही कांग्रेस पाली मांगे परिवर्तन यह नारा दिया है। दोनों ही नारे इस बार चुनावी मैदान में चर्चा में है। भाजपा से यह तीन प्रमुख दावेदार वार्ड 33 से नमिता बुबकिया - भाजपा नेता विकास बुबकिया ने अपनी पत्नी नमिता बुबकिया को चुनावी मैदान में उतारा है। वे खुद भी मैदान में उतर सकते थे। लेकिन पत्नी को महापौर के पद पर देखना उनका लक्ष्य है। ऐसे में पत्नी को उतारा है। वे कुछ पार्षद रह चुके है और भाजपा के सक्रिय नेताओं में उनकी गिनती आती है। पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा के करीबी है। उनके वार्ड में आमने-सामने की टक्कर है। कांग्रेस से सोहनलाल उन्हें टक्कर देने के लिए मैदान में है। शहर की चर्चित सीट, कांग्रेस से सीधे टक्कर - यह सीट भी शहर के हॉट सीट में शामिल है। अब तो चुनाव नतीजे ही तय करेंगे कि इस सीट से नमिता जीत कर महापौर की कुर्सी तक पहुंच पाती है या नहीं। वार्ड 23 से खुशबू लोढ़ा - भाजपा नेता अजीत लोढ़ा ने इस वार्ड से अपनी पत्नी खुशबू लोढ़ा को चुनावी मैदान में उतारा है। उन्हें भी महापौर का दावेदार के रूप में पेश किया जा रहा है। संघ से जुड़ा परिवार है और सालों से राजनीति में सक्रिय है। सिक्कम के राज्यपाल ओम माथुर, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जैसे नेताओं का उन्हें सपोर्टर माना जा रहा है। चर्चित सीट - यहां उनकी टक्कर कांग्रेस की शीला से है। चुनावी मैदान में 02 ही प्रत्याशी है। ऐसे में दोनों में आमने-सामने की टक्कर है। देखने वाली बात होगी कि खुशबू लोढ़ा महापौर की कुर्सी तक पहुंच पाती है या नहीं। वार्ड 01 से शारदा बोहरा: भाजपा नेता नरेश बोहरा की पत्नी शारदा को इस बार भाजपा ने यहां से चुनावी मैदान में उतारा है। यह वार्ड भाजपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन शारदा को भीतरी घात का खतरा है। लीला-मगराज जैन भाजपा से टिकट मांग रहे थे। नामाकंन वापस लेते समय भी उन्होंने दबाव में टिकट वापस लेने की बात कही थी। इसके साथ ही उन्हें यहां टक्कर देने के लिए कांग्रेस के गजेंद्रसिंह मंडली, आप से दलजीतसिंह सहित निर्दलीय विनोद शर्मा, जयंतीलाल डोसी भी मैदान में है। चर्चित सीट - ऐसे में यह सीट भी शहर की चर्चित सीट बनी हुई है। देखने वाली बात होगी कि जिस चेहरे को महापौर के तौर पर देखा जा रहा है। वह इन चुनौतियों को पारकर महापौर की सीट तक पहुंच पाती है या नहीं। कांग्रेस से यह तीन प्रमुख दावेदार वार्ड 38 - राजबाला हिंगड : कांग्रेस की ओर से बोर्ड बनाने की बात आती है तो वार्ड संख्या 38 से चुनाव लड़ रही कांग्रेस नेता प्रदीप हिंगड़ की पत्नी राजबाला हिंगड़ प्रमुख दावेदारों में शामिल है। उन्होंने अपना वार्ड छोड़ कांग्रेस के सेफ वार्ड से चुनावी मैदान में है। कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी, शहर ब्लॉक अध्यक्ष का उन्हें सपोर्ट है। जयपुर तक भी अच्छी लॉबिंग है। यहां आमने-सामने की टक्कर है। चुनावी मैदान में BJP की नयन श्री जैन उन्हें टक्कर दे रही है। वार्ड 34- सुमित्रा जैन : कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन को भी महापौर के चेहरे के रूप में पेश किा जा रहा है। लेकिन उनकी राह इनती आसान नजर नहीं आ रही। यहां BJP की प्रिती संचेती सहित निर्दलीय अभिषेक जैन, मोहम्मद तौफिक, अशरफ अली उन्हें टक्कर देने के लिए चुनावी मैदान में है। अभिषेक कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे नहीं मिला तो निर्दलीय मैदान में उतरे। जो कही न कही कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे। यह सीट भी शहर की चर्चित सीटों में है। देखने वाली बात होगी कि बागियों, निर्दलीय और भाजपा प्रत्याशी से पार पाकर सुमित्रा जैन चुनाव जीतकर महापौर की कुर्सी तक पहुंचती है या नहीं। वार्ड 11- लीला चौधरी - कांग्रेस के सक्रिय नेता मंगलाराम चौधरी की पत्नी लीला इस वार्ड से चुनावी मैदान में है। उन्हें भी कांग्रेस की ओर से महापौर को चेहरा माना जा रहा है। यहां उन्हें टक्कर देने के लिए BJP की सुमित्रा और निर्दलीय शबनम बानो मैदान में है। अब देखने वाली बात होगी कि इस त्रिकोणीय मुकाबले में जीत का सेहरा किसके सिर सजता है।