पल्लू क्षेत्र में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक महीने से ज्यादा समय से बारिश नहीं होने के कारण करीब दो महीने की हो चुकी खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। खेतों में मूंग और मोठ में फलियां आने का समय है, लेकिन नमी की कमी से पौधे सूखने लगे हैं। ग्वार भी मुरझाने लगा है। किसानों ने इस बार बीज, जुताई, दवाइयों और मजदूरी पर प्रति हेक्टेयर करीब 5 से 25 हजार रुपए तक खर्च किया है। ऐसे में जल्द बारिश नहीं हुई तो हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें प्रभावित होने के साथ किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। शुरुआत में अच्छी बारिश से खेत हुए थे हरे-भरे मानसून की पहली बारिश के बाद किसानों ने ग्वार, कपास, मूंग, मोठ और बाजरा की बुवाई की थी। शुरुआत में अच्छी बारिश होने से बरानी जमीन में बड़े स्तर पर बुवाई हुई और खेतों में फसलों की बढ़वार भी बेहतर रही। किसानों को इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अब बारिश का लंबा अंतराल उनकी उम्मीदों पर पानी फेरता नजर आ रहा है। फलियां आने के समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत करीब दो महीने की हो चुकी फसलों को इस समय बारिश की जरूरत है। खासकर मूंग और मोठ में फलियां आने का दौर शुरू होने वाला है। नमी नहीं मिलने से पौधों की हालत खराब होने लगी है। किसान कमलेश पारीक ने बताया कि लगातार बारिश नहीं होने से चिंता बढ़ रही है। मोठ और मूंग में फलियां आने से पहले ही पौधे खराब होने लगे हैं। 5 से 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक खर्च किसान भीमसैन भारी के अनुसार, मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश देखकर बरानी जमीन में बड़े स्तर पर बुवाई की गई थी। अब फसल फलियां निकलने के दौर में है। बारिश नहीं हुई तो किसानों की पूरी मेहनत बेकार हो सकती है। किसानों ने खेती में बीज, जुताई, दवाइयों और मजदूरी समेत प्रति हेक्टेयर करीब 5 से 25 हजार रुपए तक खर्च किया है। फसल खराब होने पर यह रकम भी डूबने का खतरा है। फसल के साथ पशुओं के चारे का भी संकट किसानों के सामने नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं रहेगा। खरीफ फसलें खराब होने की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की कमी भी हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं हुई तो खड़ी फसलों को बचाना मुश्किल होगा और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। बारिश के लिए गांवों में यज्ञ और धार्मिक आयोजन बारिश नहीं होने से ग्रामीणों की चिंता इस कदर बढ़ गई है कि अब गांवों में यज्ञ और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। ग्रामीण समय पर बारिश होने की उम्मीद में ऐसे आयोजन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें नष्ट हो सकती हैं और करोड़ों रुपए के नुकसान की स्थिति बन सकती है। कृषि विभाग ने भी माना, बारिश का लंबा अंतराल नुकसानदायक कृषि पर्यवेक्षक अजब कुमार ने बताया कि फसल के विकास के लिए समय-समय पर बारिश जरूरी है। बारिश का अंतराल बढ़ने से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मौजूदा स्थिति में आगे बारिश होना फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग किसान नेता गौरी शंकर थोरी ने सरकार से प्रभावित गांवों में विशेष गिरदावरी करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फसल खराबे का आकलन कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि बारिश की कमी से होने वाले आर्थिक नुकसान से किसानों को राहत मिल सके।