राजस्थान में शारीरिक शिक्षक अब खेल कार्यक्रम की तारीखों में उलझ गए हैं। राजस्थान शिक्षा विभाग के संशोधित खेल कार्यक्रम में जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं,शिक्षक प्रतियोगिता और शैक्षिक अधिवेशन की तिथियां इतनी पास रखी गई है कि शारीरिक शिक्षकों के सामने एक साथ कई जिम्मेदारियां आ गई हैं। शिक्षक खुद खेलें या बच्चों को खिलाएं संशोधित कार्यक्रम के अनुसार जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं 16 सितंबर से शुरू होंगी। इस दौरान 16-17 सितंबर को शिक्षक प्रतियोगिता और 18-19 सितंबर को जिला स्तरीय शिक्षक सम्मेलन आयोजित होंगे। ऐसे में राज्य भर में कार्यरत शारीरिक शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे खुद शिक्षक खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लें या विद्यार्थियों की टीम लेकर जिला स्तरीय प्रतियोगिता में जाएं या जिला स्तरीय शैक्षिक अधिवेशन में शामिल हों। स्थिति इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि एक ही समय में कई विद्यालयों और अलग-अलग आयु वर्ग की टीमों की जिम्मेदारी शारीरिक शिक्षकों पर रहती है। प्रतियोगिताओं के बीच पर्याप्त अंतर नहीं होने से टीमों को तैयार करने, विद्यार्थियों को प्रतियोगिता स्थल तक ले जाने और उनकी व्यवस्थाएं संभालने में भी दिक्कत आएगी। संशोधन की मांग शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद एवं टोंक जिलाध्यक्ष देवेंद्र प्रताप जाट ने बताया कि राज्य में 64 हजार 709 स्कूल हैं,जबकि राज्य के शिक्षा विभाग में कार्यरत शारीरिक शिक्षकों की संख्या लगभग 23 हजार ही हैं। ऐसे में कई जगह एक शारीरिक शिक्षक को अलग-अलग समूहों की टीमों के साथ प्रतियोगिताओं में जाना पड़ता है। सलावद ने कहा कि जब शारीरिक शिक्षकों की संख्या पहले ही जरूरत के मुकाबले कम हैं। ऐसे में प्रतियोगिताओं की तिथियां एक-दूसरे के करीब रखने से खेल गतिविधियों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की प्रतियोगिताओं पर पड़ेगा। इसलिए माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को इस पर गंभीरता से विचार करके निर्णय करना चाहिए।अगर तिथियों में बदलाव नहीं हुआ तो प्रतियोगिताओं महज एक औपचारिकता रह जाएंगी या शारीरिक शिक्षक इनमें भाग नहीं ले पाएंगे।