बारां| शाहबाद के जंगलों, प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन अब नई दिल्ली तक पहुंचेगा। 6 और 7 सितंबर को नई दिल्ली में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की ओर से दो दिवसीय आदिवासी अधिकारों के लिए राष्ट्रीय संघर्ष सम्मेलन होगा। इसमें शाहबाद क्षेत्र के सहरिया आदिवासी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे। सहरिया आदिवासी विकास मंच, शाहबाद के प्रवक्ता और शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता विजय राघव ने कहा कि शाहबाद के जंगल, पहाड़, नदियां, वन्य जीव सिर्फ पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं। यह सहरिया समाज के अस्तित्व, पहचान, आजीविका की जीवनरेखा हैं। सहरिया समुदाय सदियों से आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षक रहा है। कुल्हाड़ी उनके जीवनयापन, सुरक्षा, संरक्षण का प्रतीक रही है। सम्मेलन में शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत हाइड्रो पावर प्लांट से होने वाले नुकसान पर चर्चा होगी।