भास्कर न्यूज| बूंदी बूंदीस्थ ज्योतिष व धर्मशास्त्र परिषद की ओर से श्रावणी पूर्णिमा पर जैतसागर किनारे माधव की पैड़ियों पर श्रावणी उपाकर्म किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विप्रजनों ने नूतन यज्ञोपवीत धारण कर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की। परिषद के मीडिया प्रभारी ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम ने बताया कि वरिष्ठ सदस्य लक्ष्मीकांत शर्मा के निर्देशन में पं. अनिल शर्मा वेदपाठी, विनोद गौतम, जगदीश राजोरा, हरीश श्रृंगी, राजेंद्र जोशी, हेरंब जोशी, प्रणयकांत शर्मा, शिवकांत शर्मा और अमन शर्मा ठीकरदा ने वैदिक विधि से श्रावणी उपाकर्म कराया। इसमें प्रायश्चित संकल्प, सूर्य आराधना, दशविधि स्नान, देव-ऋषि-पितृ तर्पण, सूर्योपस्थान, यज्ञोपवीत धारण, प्राणायाम, अग्निहोत्र और ऋषि पूजन किया गया। इस दौरान चारों वेदों के पूजन, स्वस्तिवाचन, भद्रसूक्त और शांतिपाठ किया। साथ ही, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधायक सहित लोकसेवकों के स्वस्थ और कुशल नेतृत्व की मंगल कामना की गई। राष्ट्र और जिले की सुख-शांति, समृद्धि व विकास की भी कामना की गई। लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि श्रावणी कर्म स्वाध्याय, सुसंस्कार और प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। पं. अनिल शर्मा ने श्रावण में कीट-पतंगे, वायरस और बैक्टीरिया के प्रकोप को देखते हुए अग्निहोत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। विनोद गौतम ने श्रावणी पर्व को मानव और प्रकृति के संबंध का प्रतीक बताया। संचालन पं. अनिल शर्मा ने किया।