श्रीगंगानगर में नई धान मंडी की व्यवस्थाओं की पोल एक ही बारिश में खुल गई। शुक्रवार शाम को हुई तेज बारिश से मंडी परिसर में पानी भर गया। दूसरे दिन शनिवार दोपहर तक भी निकल नहीं सका। चारों तरफ जलभराव, कचरा और गंदगी फैली हुई है। व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हर महीने धान मंडी की सफाई के लिए 4.80 लाख रुपए का ठेका चलता है। करीब 57 लाख से ज्यादा हर साल खर्च होते हैं। यह स्थायी ठेका कच्चा आढ़तिया संघ के पास है, लेकिन सफाई कर्मचारी नजर नहीं आते। साफ-सफाई नहीं, नालियां ओवरफ्लो मजदूर संघ के अध्यक्ष साधु सिंह ने कहा- कच्चा आढ़तिया संघ वाले बिल तो उठा लेते हैं, लेकिन साफ-सफाई नहीं करवाते। नालियों की सफाई भी नहीं होती। नतीजा यह कि नालियां जाम हो जाती हैं और ओवरफ्लो होने लगती हैं। यही पानी किसानों की जिंसों और दुकानों में घुस जाता है। नहीं हुआ समस्या का समाधान जलभराव के कारण मंडी की पक्की सड़कों पर भी गड्ढे बन गए हैं। इनसे रोजाना दुर्घटनाएं होती रहती हैं। बारिश के बाद परिसर में कचरा और गंदगी फैल जाती है, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाता। यहां बैठे व्यापारियों को रोजाना भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बदबू और गंदगी से मौसमी बीमारियां फैलने का खतरा भी बना रहता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बारिश का मौसम और मुश्किलें बढ़ाएगा।