यमन में हूतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। हूतियों विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी के 4 शहरों पर हमला किया। इसमें 73 लोग घायल हुए। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सऊदी में अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और अरामको की कुछ फैसिलिटी पर भी हमले की खबर है। इन हमलों से कुछ घंटे पहले हूती विद्रोहियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने अल-हज्म शहर में एक जेल पर हमला किया था। इस हमले में 11 लोग मारे गए। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल है। वह अपनी मां के साथ अपने पिता से मिलने आया था। जेल के वार्डन के मुताबिक, मलबे में एक महिला समेत 35 कैदी अभी भी फंसे हुए हैं। सऊदी पर हूती हमले की 2 फोटोज सऊदी बोला- हमले का बदला लेंगे सऊदी नेतृत्व वाले यमन गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने मंगलवार को कहा कि हूतियों ने सऊदी अरब में नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर हमले किए। उन्होंने कहा कि ये हमले सऊदी की संप्रभुता के खिलाफ हैं और आम लोगों के लिए खतरा हैं। अल-मलिकी ने कहा कि गठबंधन इन हमलों का जवाब देगा और खतरे को रोकने के लिए जरूरी सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि हूतियों ने ये हमले किस समय किए थे। यमन में फिर क्यों तेज हुई लड़ाई यमन में 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ था। इसके बाद बड़े स्तर की लड़ाई काफी कम हो गई थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हुआ था। 2026 में हालात फिर बिगड़ने लगे। यमन में हूतियों और सऊदी समर्थित यमनी सेना के बीच हमले बढ़ गए। दरअसल, ईरान अमेरिका के साथ जंग में फंसा हुआ है। ऐसे में यमन सरकार हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना चाहती है, जबकि हूती लाल सागर के तटीय इलाकों और बाब अल-मंदेब के आसपास अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। सऊदी ने 2015 में हूती के खिलाफ जंग शुरू की हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया। इससे पड़ोस के सऊदी अरब को खतरा महसूस हुआ क्योंकि हूती का समर्थन ईरान कर रहा था। ऐसे में सऊदी ने 2015 में आठ अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस गठबंधन का मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर सत्ता में लाना था। करीब आठ साल तक लड़ाई के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूतियों को हराना संभव नहीं है। इसके बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से संपर्क शुरू किया। आज उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूतियों का नियंत्रण है। वहीं दक्षिणी यमन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। --------------------- यह खबर भी पढ़ें… यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत:बाब अल-मंदेब पर कब्जे की कोशिश यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी फोर्स के बीच भीषण लड़ाई में 129 लोगों की मौत हुई है। हूती बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…