सरकारी तंत्र की सुस्ती और विरोधाभासी फैसलों का आलम यह है कि कहीं सरकार के आदेशों को सवा साल तक ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है तो कहीं बिना सोचे-समझे एक ही कुर्सी पर दो-दो दावेदार बिठा दिए जाते हैं। पशुपालन विभाग और जिला परिषद में ऐसे मामले सामने आए हैं। एक तरफ रसूख और लापरवाही के चलते तबादला आदेश हवा में उड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बहाली के चक्कर में विभाग यह भी भूल गया कि जिस केंद्र पर नियुक्ति दी जा रही है, वहां जगह खाली है भी या नहीं। पशुपालन : सच माना, सुधार का इंतजार राय बहादुर सिंह डामोर को रजिस्टर में फर्जी हस्ताक्षर कर ड्यूटी से गायब रहने (अनुशासनहीनता) पर इसी साल 25 फरवरी को निलंबित कर भरतपुर मुख्यालय भेजा गया था। निलंबन के ठीक दो माह बाद 20 अप्रैल को निदेशक ने डामोर को बहाल कर डाकन कोटड़ा उप केंद्र पर पदस्थापित कर दिया। यहां रोशनी कुमारी पहले से कार्यरत हैं। अब एक कुर्सी पर दो दावेदार होने से विवाद है। सवाल पर बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय के उपनिदेशक डॉ. शैलेंद्र शुक्ला का कहना है कि अभी ट्रांसफर पर प्रतिबंध है। इस कारण यह स्थिति बनी है। एक पद पर दो कर्मचारी हो गए हैं, लेकिन इसे अगले आदेशों में बदलाव कर सुधार दिया जाएगा। जिला परिषद : अब सवाल पर सब मौन अतिरिक्त विकास अधिकारी (एडीओ) राजेंद्र शर्मा का तबादला पिछले साल 15 जनवरी को सागवाड़ा (डूंगरपुर) किया गया था। उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। विभाग ने फरवरी-2025 में रिमाइंडर भेजकर संबंधित अधिकारियों को रिलीव करने के निर्देश दिए थे, फिर भी कार्यमुक्त नहीं किया गया। इस मामले में संबंधित पक्षों से बात की गई तो विरोधाभासी जवाब सामने आए। एडीओ शर्मा का तर्क है कि अधिकारियों ने रिलीव ही नहीं किया तो जॉइन कैसे करते? जिला परिषद के एसीईओ विरमा राम ने कहा कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। तत्कालीन सीईओ रिया डाबी ने कहा कि उनका तबादला अब जयपुर में हो चुका, इसलिए वे कुछ नहीं कहना चाहतीं।