दीपावली पर जयपुर में कचरा बढ़ा तो नगर निगम ने सफाई के लिए 3 हजार अतिरिक्त कर्मचारी लगा दिए। इन पर एक महीने में करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के पास 7 हजार स्थायी सफाईकर्मी पहले से हैं। इसके बावजूद न घर से रोज कचरा उठ रहा है और ना कचरा डिपो से। यानी 10 हजार कर्मचारी होने के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। खुले कचरा डिपो 400 से बढ़कर 600 हो गए। इनमें से भी 78 से कचरा नहीं उठ पाता। दरअसल, दीपावली पर शहर में रोजाना निकलने वाला कचरा 2200 टन से बढ़कर 3000 टन पहुंच गया है। यानी रोज 800 टन अतिरिक्त कचरा निकल रहा है। ऐसे में घरों से रोज कचरा नहीं उठ रहा है। कुछ जगह एक दिन तो कुछ जगह दो दिन छोड़कर हूपर आ रहे हैं। इससे घरों में कचरा जमा हो रहा है और लोग खुले में कचरा डालने को मजबूर हैं। निगम ने सफाईकर्मी तो बढ़ा दिए, लेकिन घरों से कचरा उठाने और उसे डिपो से आगे पहुंचाने की व्यवस्था नहीं बढ़ाई। इसी तालमेल की कमी का खामियाजा शहर भुगत रहा है। हूपरों के बंटवारे में असमानता; 67 वार्डों में 409, बाकी 83 वार्डों में सिर्फ 388 नगर निगम के रिकॉर्ड में 13 जोन के 150 वार्डों में सुबह घर-घर कचरा उठाने के लिए 797 हूपर दर्ज हैं। विद्याधर नगर, सांगानेर, झोटवाड़ा, वैशाली नगर, जगतपुरा, झालाना और आदर्श नगर जोन के 67 वार्डों में 409 हूपर हैं। यानी औसतन 6 हूपर प्रति वार्ड। हवामहल-आमेर, किशनपोल, मालवीय नगर, सिविल लाइंस, मुरलीपुरा और मानसरोवर जोन के 83 वार्डों में सिर्फ 388 हूपर हैं। यानी औसतन 4.7 हूपर प्रति वार्ड। हालांकि, यह तुलना वाहनों की संख्या के आधार पर है। जोनवार बंटवारे में भी लापरवाही; कहीं 81 तो कहीं सिर्फ 42 हूपर जोनवार रिकॉर्ड में हवामहल-आमेर में सर्वाधिक 81 हूपर दर्ज हैं। मानसरोवर में 73, वैशाली नगर और सिविल लाइंस में 71-71 हूपर हैं। किशनपोल में 42 और जगतपुरा में 43 हूपर ही हैं। झोटवाड़ा के वार्ड 26 में 20 हूपर दर्ज हैं, लेकिन निगम के पास यह स्पष्ट जवाब नहीं है कि किस वार्ड में कितने घरों से कचरा उठाना है, रोज कितने फेरे जरूरी हैं और कितने वाहन वास्तव में सड़क पर हैं। खुले डिपो 50% बढ़े, 78 से कचरा ही नहीं उठ रहा शहर में खुले कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 हो गई है। यानी 200 नए डिपो बन गए। इनमें 78 डिपो से कचरा नहीं उठ रहा। यह कुल डिपो का 13% है। निगम ने छह जोन में घर-घर कचरा संग्रहण का जिम्मा ठेका कंपनियों को दे रखा है। इसके बावजूद कई इलाकों में हूपर तय समय पर नहीं पहुंच रहे। कहीं रोजाना के फेरे पूरे नहीं हो रहे तो कहीं एक चक्कर लगाकर ही काम खत्म किया जा रहा है। सवाल है कि ठेका कंपनियों के वाहनों और उनके फेरों की निगरानी कौन कर रहा है? यदि नियमित उठाव हो रहा है तो खुले डिपो क्यों बढ़ रहे हैं? जहां हूपर कम हैं, वहां अतिरिक्त व्यवस्था करेंगे : महापौर शहर में संचालित हूपरों की संख्या को लेकर अधिकारियों से चर्चा की है। जिन क्षेत्रों में हूपरों की कमी है, वहां अतिरिक्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। -सुनील कोठारी, महापौर, नगर निगम