राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देश पर शनिवार को जिला न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में एनआई एक्ट के लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए विशेष लोक अदालत लगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरोही के अध्यक्ष, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा के निर्देशन में अदालत में एनआई एक्ट के कुल 1286 मामलों में से 116 प्रकरण आपसी सहमति से मौके पर निपटे। इन मामलों में पक्षकारों के बीच 2,18,74,983 रुपए का अवार्ड पारित हुआ। लोक अदालत का उद्देश्य आपसी समझौते से मामलों का त्वरित निस्तारण रहा। प्रक्रिया सरल रही। खर्च कम रहा। लंबे समय से लंबित एनआई एक्ट के मामलों की सुनवाई हुई। प्री-लिटिगेशन स्तर के प्रकरण भी आपसी सहमति से सुलझाने के प्रयास हुए। इससे कई परिवारों और व्यवसायियों के पुराने विवाद खत्म हुए। जिला जज अजय शर्मा ने कहा, लोक अदालत न्याय पाने का प्रभावी और सुलभ माध्यम है। इससे पक्षकार अदालतों के चक्कर से बचते हैं। अनावश्यक देरी रुकती है। अतिरिक्त खर्च बचता है। विवाद का स्थायी, सर्वमान्य समाधान मिलता है। उन्होंने आमजन से अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। जिला विधिक प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद निर्भीक ने विशेष लोक अदालत के दौरान पक्षकारों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी से पारित किया गया अवार्ड अंतिम और बाध्यकारी होता है। इसके खिलाफ किसी भी अन्य न्यायालय में कोई अपील नहीं की जा सकती। यहां फैसला होने से पुराने मुकदमों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति मिल जाती है। मामले में न्यायालय शुल्क जमा कराया गया है, तो लोक अदालत में सेटलमेंट होने पर नियमानुसार उसका रिफंड भी किया जाता है।