अनिल शर्मा | अलवर यूआईटी में अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एसीई), अधीक्षण अभियंता (एसई) व अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के 5 पद स्वीकृत हैं। इसमें एसीई व एसई का एक-एक और एक्सईएन के 3 पद हैं। लेकिन यूआईटी में स्वीकृत 5 में से 4 पद खाली हैं। खास बात यह है कि यूआईटी में 2 एक्सईएन होते हुए भी स्वीकृत 3 पदों में से 2 खाली है। यूआईटी में एक एक्सईएन के पास पिछले 5 महीने से चार्ज नहीं है। यूआईटी एक्सईएन को हर माह 1.5 लाख रुपए का वेतन दे रही हैं, लेकिन काम कुछ नहीं कराया जा रहा। जेईएन के 16 पदों में से 11 व एईएन के 8 में से 4 पद खाली है। तकनीकी शाखा में इंजीनियर्स के पद खाली होने से डवलपमेंट के काम प्रभावित हो रहे हैं। हाल ही में हुई यूआईटी ट्रस्ट मीटिंग में भी तकनीकी शाखा की ओर से ऐसा कोई एजेंडा नहीं रखा गया। केवल पुराने चल रहे कामों को ही अनुमोदन के लिए रखा गया। ^एक्सईएन को चार्ज देने के लिए यूडीएच से परमिशन लेनी होगी। इसके अलावा एईएन को भी अतिरिक्त चार्ज दिया जाएगा। इसके लिए यूडीएच को लेटर लिखा है। - धायगुडे स्नेहल नाना, सचिव, यूआईटी यूआईटी में एसीई का पद एक साल पहले पारूतोष गुप्ता के ट्रांसफर होने से खाली है। एसई का पद 4 महीने से। सहारा की भूमि पर अवैध प्लॉटिंग कराने के आरोप लगने पर एसई तैयब खान को एपीओ किया गया था। तभी से पद खाली है। वहीं, एक्सईएन के तीन में से एक पद चार साल से खाली है। जबकि एक पद हाल ही में एक्सईएन कुमार संभव अवस्थी के रिटायर्ड होने से खाली हो गया। एक एक्सईएन अशोक मदान अगस्त माह में रिटायर्ड होंगे। दूसरी ओर एक्सईएन आलोक नाग के पास पिछले 5 महीने से कोई चार्ज नहीं है। आलोक नाग का पीएचईडी से यूआईटी में करीब 16 महीने पहले ट्रांसफर हुआ था। शुरुआती 2-3 महीने उन्हें कोई चार्ज नहीं दिया। मार्च 2025 में ईआरओ अनिल शर्मा के रिटायर्ड होने पर उन्हें ईआरओ का चार्ज मिला। लेकिन अक्टूबर 2025 में ईआरओ के पद पर मानवेंद्र जायसवाल के आने के बाद से उनके पास कोई चार्ज नहीं है। यूआईटी की सभी शाखाओं में पद खाली है। अधिकारी व कार्मिक रिटायर्ड हो रहे हैं, लेकिन नई पोस्टिंग नहीं हो रही। तकनीकी शाखा में उच्च इंजीनियरों के पद खाली होने से विकास के काम प्रभावित हो रहे हैं। विभाग की शेड्यूल ऑफ पावर (एसओपी) में एसीई, एसई व एक्सईएन के काम निर्धारित है। उच्च अधिकारियों के पद खाली होने से एस्टिमेट व टेंडर सेंक्शन व टेंडर रेट अप्रुवल जैसे काम प्रभावित होते हैं। पीएचईडी के इंजीनियर को भी सिविल कामों की बेसिक जानकारी होती है। पीएचईडी का इंजीनियर होने के आधार पर सिविल कामों का चार्ज नहीं देना गलत है। -प्रमोद शर्मा, रिटायर्ड एक्सईएन, यूआईटी