भास्कर संवाददाता | चूरू जिले में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सा विभाग एक्शन मोड में हैं। जिले में गर्भवती महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले ज्यादा हैं। वर्तमान में जिले में 16742 एएनसी (पंजीकृत गर्भवती महिलाएं, जिनकी अगले 6 माह में डिलीवरी होगी) हैं। इनमें से 1902 गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को लेकर चिह्नित किया गया है। यानी हर 10 गर्भवती महिलाओं में एक को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी हैं। इनमें एनीमिया, हाइपरटेंशन, डायबिटीज सहित अन्य बीमारियां पाई हैं। बता दें कि इस संबंध में मुख्य सचिव ने वीसी भी ली थी, जिसमें ये सामने आया कि प्रदेश में चूरू, सीकर, नागौर, जालोर और बांसवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क पर हैं। ^फील्ड में कार्यरत सभी कार्मिकों को हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। एएनसी जांच करने तथा हीमोग्लोबिन, बीपी, शुगर आदि की समय पर जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। -डॉ. शशांक चौधरी, आरसीएचओ 1. विभाग की ओर से हाई रिस्क चिह्नित होने के बाद गर्भवती महिलाएं हर 15 दिन या डॉक्टर के बताए अनुसार रुटीन चैकअप बेहद जरूरी है। 2. हरी पत्तेदार सब्जियां, अनार, चुकंदर, डॉक्टर द्वारा दी गई आयरन-फॉलिक एसिड व कैल्शियम की टेबलेट खाएं। 3. अचानक वजन बढ़ना, चेहरे या पैरों में ज्यादा सूजन आना, धुंधला दिखना या पेट में बच्चे की हलचल कम होना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत चैकअप कराएं। 4. हाई रिस्क गर्भवती की डिलीवरी अस्पताल में कराई जानी चाहिए, जहां आईसीयू और ब्लड बैंक की सुविधा हो। एनीमिया : स्क्रीनिंग में 333 गर्भवती महिलाओं में ये बीमारी सामने आई। महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा काफी कम पाई गई। एनीमिया के कारण प्री-मैच्योर डिलीवरी की आशंका बढ़ जाती है। डिलीवरी के समय अधिक ब्लीडिंग होने पर मां की जान पर संकट आ जाता है। हाइपरटेंशन व डायबिटीज : सघन जांच में 83 गर्भवती में हाइपरटेंशन व 16 में डायबिटीज सामने आई है। गर्भावस्था में डायबिटीज कंट्रोल ना हो, तो बच्चे का वजन असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इससे नॉर्मल डिलीवरी असंभव हो जाती है। जन्म के तुरंत बाद बच्चे का शुगर लेवल अचानक गिरने का खतरा भी रहता है। वहीं हाई बीपी प्री-एकलम्पसिया का रूप ले सकता है। जिससे गर्भवती महिला को दौरे पड़ सकते हैं। ये स्थिति गर्भनाल में खून के दौरे को रोक सकती है। जो बच्चे के लिए घातक है। संक्रमण व अन्य बीमारियां : 124 गर्भवती महिलाओं में दूसरी तरह की बीमारियां मिली। इनमें हार्ट डिजीज, किडनी संबंधी बीमारी, बार-बार गर्भपात, मल्टीपल प्रेग्नेंसी, भ्रूण की गलत स्थिति, मिर्गी व न्यूरोलॉजिकल समस्या, थायराइड विकार शामिल हैं। संक्रमण की बीमारियों का समय पर इलाज नहीं होने पर ये शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास को प्रभावित करती है। 15 से 20 जुलाई तक चला जांच अभियान : विभाग ने सरकार के निर्देशों पर 15 से 20 जुलाई तक गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सघन स्क्रीनिंग अभियान चलाया था। अभियान के तहत जिले में 2765 गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें से 556 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर पाई गई है। इसमें भी 333 में एनीमिया, 83 महिलाओं में हाइपरटेंशन, 16 में डायबिटीज व 124 में अन्य बीमारियां मिली। अब इन हाई रिस्क महिलाओं की समय-समय पर जांच की जाएंगी। विभाग की टीम इन महिलाओं घर पर जाकर इनकी जांच करेंगी। जिले में मातृ मृत्यु के आंकड़ों की बात करें तो जिले में हर माह करीब एक मातृ मृत्यु का केस दर्ज होता है। विभाग का दावा है कि बीते सालों में मातृ मृत्यु के मामलों में काफी कमी आई है।