भास्कर न्यूज | बाड़मेर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय माल गोदाम रोड में बाड़मेर नगर कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि की ओर से मां-बेटी सम्मेलन हुआ। मुख्य वक्ता अशोक दवे व विभाग संयोजक जेठुदान चारण, जिला संयोजक बाबूलाल जांदू, सह संयोजक रामसिंह पंवार, शिक्षण संस्था संयोजक बगताराम जाखड़ व प्राचार्य धर्मवीर की उपस्थिति रही। मीडिया संयोजक नरेन्द्र कुमार जैन विनय ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत भारत मां के पूजन से हुई। महावीर बोथरा के काव्यगीत से आगाज हुआ। सम्मेलन में लक्ष्मण कड़वासरा, बालाराम गोदारा, सोहन माली ढूंढा, सत्यनारायण गुप्ता, चेनाराम प्रजापत, रूपसिंह इंदा सहित भामाशाहों का साफा पहनाकर अभिनंदन किया । व्यवस्थाओं में प्राचार्य धर्मवीर की अहम भूमिका रही। उनका शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। संचालन वीरचंद सैन और कोषाध्यक्ष महावीर बोथरा ने किया। रजिस्ट्रेशन जेती चौधरी ने किया। स्वागत मीनाक्षी वशिष्ठ ने किया। सम्मेलन दो सत्रों में हुआ। पहले सत्र में अशोक दवे ने कहा कि हमारे ऋषियों, तपस्वियों, सतियों के जीवन से जुड़ा लिखित ज्ञान मौजूद है। उन्होंने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में कन्याओं का परिवार के प्रति व्यवहार चिंतनीय है। रिश्तों में सामंजस्य जरूरी है। रिश्तों का सम्मान जरूरी है। आपसी संवाद की कमी से रिश्तों में रिक्तता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी या वे स्वतंत्र नहीं थीं, यह आरोप सही नहीं है। उन्होंने कई विदुषी महिलाओं के नाम गिनाए। कई वीरांगनाओं के नाम गिनाए। उन्होंने कहा कि नारी ने हर क्षेत्र को छुआ हैदूसरे सत्र की शुरुआत मातृ सम्मेलन संयोजिका लीना चंद्रास के वक्तव्य से हुई। उन्होंने कहा कि मां को बेटी को जन्म देने का अधिकार है। मां को यह अधिकार भी है कि वह बेटे-बेटी के आचार, विचार, व्यवहार, पहनावे पर ध्यान दे। इच्छा सोनी ने काव्यपाठ से विचार रखे। वीरचंद सैन ने काव्यपाठ सुनाया। दूसरे सत्र के मुख्य वक्ता जेठुदान चारण ने सभ्य परिवार कैसा हो, इस पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बेटी को परिवार में अपनी भूमिका समझनी चाहिए। घर में शांति का वातावरण रहे। सभी मिलकर कर्तव्यों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि परिवार में क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, यह तय हो। उन्होंने सप्ताह में एक बार सभी सदस्यों के साथ बैठकर भोजन करने की बात कही। साथ में पूजा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि घर में हर चीज का स्थान तय हो। मोबाइल का स्थान भी तय हो। मोबाइल का उपयोग जरूरत पर ही हो। भोजन के समय मोबाइल का उपयोग बिल्कुल नहीं हो। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य धर्मवीर व बाबूलाल जांदू ने आभार व्यक्त किया।