केंद्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर आयुर्वेद के एमएस (शल्य) डॉक्टरों को अपेंडिक्स, मोतियाबिंद, गॉलब्लाडर और हर्निया जैसी 58 प्रकार की जटिल सर्जरियां करने का अधिकार तो दे दिया, लेकिन धरातल पर एनेस्थीसिया (संज्ञाहरण) का गणित उलझा हुआ है। नियमों में अधिकार मिलने के बावजूद अस्पतालों में मरीज को बेहोश करने के लिए आयुर्वेद डॉक्टरों को आज भी एलोपैथी के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है। शहर के मदन मोहन मालवीय आयुर्वेद कॉलेज के सर्जरी विभाग में 5 डॉक्टरों की टीम तैनात है। लेकिन काम के नाम पर सालभर में महज 400 के करीब बवासीर, फिशर व फिस्टूला के ही छोटे-मोटे ऑपरेशन होते हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. हरिमोहन मीणा का कहना है कि ओटी उपलब्ध है, पर बड़ी सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया अड़चन बना हुआ है। सरकारी दर ~750, इस मानदेय में कौन विशेषज्ञ डॉक्टर आएगा? आयुर्वेद अस्पतालों में न तो खुद का सर्जन उपलब्ध है और न ही एनेस्थेटिस्ट। सरकार ने नियम बनाया है कि ऑपरेशन के समय बाहर से एनेस्थेटिस्ट और सर्जन को बुलाया जाएगा। इसके लिए महज 750 रु. मानदेय तय है। सवाल यह है कि इतने कम मानदेय पर आरएनटी मेडिकल कॉलेज का कोई विशेषज्ञ डॉक्टर रिस्क लेकर नियमित सेवा देने क्यों आएगा? गजट में इन 58 सर्जरियों की लंबी लिस्ट भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद के 2020 संशोधनों के अनुसार, स्नातकोत्तर आयुर्वेद डॉक्टरों को इन सर्जरियों की छूट है। इनमें शल्य तंत्र के तहत अपेंडिक्स, गॉलब्लाडर, हर्निया, गैंग्रीन उच्छेदन, स्किन ग्राफ्टिंग और ट्यूमर सर्जरी, जबकि मोतियाबिंद, सेप्टोप्लास्टी, टॉन्सिल, भेंगापन का इलाज शामिल। जोखिम: बिना प्रशिक्षण खुद दे रहे एनेस्थीसिया सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विशेषज्ञ एनेस्थेटिस्ट न मिलने पर आयुर्वेद चिकित्सक बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के खुद ही एनेस्थीसिया देकर मरीज को बेहोश करने का खतरा मोल ले रहे हैं। इस दौरान मरीज की स्थिति बिगड़ने का डर बना रहता है। आयुर्वेद में संज्ञाहरण की औषधि नहीं अभी आयुर्वेद में संज्ञाहरण के लिए कोई आयुर्वेदिक औषधि नहीं बनी है। मरीज की सुरक्षा के लिए एलोपैथी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। कॉलेजों को स्थानीय मेडिकल कॉलेजों से समन्वय करते हुए सर्जरी करनी चाहिए। -प्रो. गोविंद सहाय, कुलगुरु, आयुर्वेद विवि, जोधपुर सर्जरी शिविरों के लिए बजट बढ़ाया है इस संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से अनुमति मिल गई है। इसके बाद अब हमने आयुर्वेद के सर्जरी शिविरों के लिए बजट 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दिया है। इससे इस समस्या से राहत मिलेगी। -डॉ. आनंद शर्मा, निदेशक, आयुर्वेद विभाग