बाड़मेर में भीषण अकाल की वजह से किसानों को चारे-पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस बार बाजरे का उत्पादन नहीं हुआ। इस कारण अनाज का संकट भी झेलना पड़ रहा है। 90 फीसदी किसानों के खेतों में अनाज की पैदावार नहीं हुई। किसानों को गुजरात के पालनपुर व जयपुर इलाके का बाजरा खरीदना पड़ रहा है। बाड़मेर में अधिकांश लोग बाजरे का ही सेवन करते हैं। संकट के कारण बढ़ती महंगाई ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाजरे का भाव 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हर साल बाड़मेर में 6.62 लाख क्विंटल बाजरे का उत्पादन होता है। इस बार उपज नहीं हुई। इससे किसानों को 50.26 अरब का नुकसान हुआ है। सरहदी बाड़मेर में अकाल ने दो दशक पुराने उस भयावह दौर की वापसी करा दी है। तब घरों में अनाज के कोठे (कोठियां) खाली हो जाते थे। पशुओं के लिए घास का संकट है। हलक तर करने के लिए पानी का संकट है। थार के बाशिंदों के सामने अब सबसे बड़ा संकट खुद के निवाले का आ खड़ा हुआ है। जिले के कुल 5 लाख परिवारों में से 90 फीसदी, यानी करीब 4.5 लाख परिवारों के खेतों में इस बार बाजरे का दाना तक नहीं पका। नतीजा यह है कि पूरे जिले को अपनी खुराक पूरी करने के लिए गुजरात के पालनपुर और जयपुर की मंडियों से आ रहे बाजरे पर निर्भर होना पड़ रहा है। 1800 रुपए में बिकने वाला बाजरा, अब 3 हजार पहुंचा थार के लोगों का मुख्य खाद्यान्न बाजरा है। पहले यह 1800 से 2100 रुपए प्रति क्विंटल बिकता था। आज यह 3000 रुपए प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया है। अकाल, बेरोजगारी, खाद्यान्न की बेतहाशा महंगाई ने सीमांत किसानों व दिहाड़ी मजदूरों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। थार में 5 से 7 सदस्यों के सामान्य परिवार में औसतन सवा से डेढ़ क्विंटल बाजरा हर महीने पिसता है। खुद की पैदावार होने पर यह खर्च शून्य रहता था। अब 3000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव कमर तोड़ रहे हैं। पशुधन बचाने के लिए जेवर-जमीन गिरवी रखे किसान पहले ही गाय-बैलों को बचाने के लिए महंगे दामों में सूखा चारा (कुतर) खरीदकर कर्जदार हो चुके हैं। अब घर का अनाज भी खत्म हो गया है। ग्रामीणों को साहूकारों से ब्याज पर रकम उठाकर आटा-दाल की व्यवस्था करनी पड़ रही है। बाड़मेर के किसानों को अब गुजरात और पूर्वी राजस्थान से आ रहे हाइब्रिड बाजरा खरीदना पड़ रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि 20 साल पहले 2002-03 के त्रिकाल में ऐसे हालात बने थे। तब बाहर से मंगवाया हुआ अनाज खाना पड़ा था। बाड़मेर की स्थानीय कृषि उपज मंडियों में देसी माल की आवक शून्य है।