श्रीगंगानगर। 8 ए गांव स्थित शहीद बाबा सुखा सिंह व बाबा मेहताब सिंह निहंग छावनी में मन्नत पूरी होने पर एक श्रद्धालु ने बछेरा (घोड़े का बच्चा) भेंट किया। जत्थेदार बाबा बलवीर सिंह ने बताया कि निहंगों के जीवन में घोड़े का विशेष महत्व होता है। गांव सज्जनवाला 27 एमएल निवासी सरदार लखविंद्र सिंह ने वशेरा भेंट किया। इस अवसर पर बाबा सिमरणजीत, रणजोत सिंह सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। निहंगों को बछेरा (घोड़े का बच्चा) क्यों भेंट किया जाता है? बाबा सिमरणजीत ने बताया कि सिख परंपरा में निहंगों का घोड़े से विशेष संबंध माना जाता है। निहंगों की पहचान उनके शस्त्रों के साथ-साथ उत्कृष्ट घुड़सवारी से भी जुड़ी है। इतिहास में निहंग दल घोड़ों पर सवार होकर धर्म और समाज की रक्षा करते थे। इसी परंपरा के चलते मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु निहंग छावनी में बछेरा (घोड़े का बच्चा) भेंट करते हैं। इसे सेवा, श्रद्धा, गुरु परंपरा के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। छावनी में इन घोड़ों का पालन-पोषण किया जाता है। बड़े होने पर धार्मिक आयोजनों, नगर कीर्तन, गतका प्रदर्शन, पारंपरिक घुड़सवारी में उनका उपयोग किया जाता है।