ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर देशभर के लोगों से साइबर ठगी करने वाले अजमेर के अंतरराज्यीय गिरोह के बदमाशों को पुलिस ने पकड़ा। रामगंज थाना पुलिस और जिला साइबर सेल ने 13 जुलाई को संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी रामाकिशन उर्फ प्रकाश भींचर (19) निवासी डाबोली मीठी थाना डेगाना, कैलाश (22) निवासी छोटी खाटू थाना खुनखुना और गोपाल डूकिया (18) निवासी जायल नागौर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार- रामाकिशन इस गिरोह का मुख्य सरगना है। एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया- आरोपी सोशल मीडिया पर एक-दो मिनट के ऑनलाइन गेम के विज्ञापन चलाते थे। लिंक पर क्लिक करने वाले लोगों को गेम खेलने या इनाम जीतने के नाम पर पहले पैसे जमा कराने के लिए कहा जाता। जैसे ही पीड़ित राशि ट्रांसफर करता तब आरोपी वेबसाइट बंद कर देते और उससे संपर्क टूट जाता। आरोपी ठगी की रकम अपने खातों में न लेकर म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर करवाते थे, ताकि पुलिस आसानी से आरोपियों तक नहीं पहुंच सके। आरोपी करीब 10-15 दिनों से रामगंज थाना क्षेत्र में किराए का मकान लेकर ठहरे हुए थे। सोशल मीडिया के जरिए लोगों को ऑनलाइन गेमिंग का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी कर रहे थे। मुखबिर की सूचना पर दबिश एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया- 13 जुलाई की रात गश्त के दौरान रामगंज थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि न्यू चंद्रा नगर विनायक पथ स्थित एक मकान में कुछ युवक संदिग्ध गतिविधियां चला रहे हैं। सूचना मिलते ही रामगंज थाना पुलिस और साइबर सेल प्रभारी विजय सिंह की टीम ने मकान पर दबिश दी। वहां तीन युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए ऑनलाइन ठगी करते मिले, जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों से एक लैपटॉप और छह मोबाइल फोन बरामद किए। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है। वहीं बैंक खातों की जांच के बाद ठगी की वास्तविक रकम सामने आएगी। देशभर में फैला नेटवर्क, बैंक खातों की जांच शुरू रामगंज थाने में आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा संख्या 237/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया कि गिरोह ने देशभर के कई लोगों को निशाना बनाया है। बैंक स्टेटमेंट मिलने के बाद ठगी की कुल राशि का खुलासा होगा। रिमांड में होंगे कई और खुलासे पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। पूछताछ में गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों और साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।