अजमेर के JLN अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत के मामले में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए जांच पर कड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (FR) को दूषित मानते हुए खारिज कर दिया और रेजिडेंट डॉक्टर खुशबू जैन व कोतवाली थाने के तत्कालीन ASI देवाराम गोदारा के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए। ये फैसला सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम वर्ग) की अदालत ने सुनाया है। इस फैसले से मामले ने नया मोड़ ले लिया है और अब जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 4 जून को होगी। अदालत ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में दूषित अनुसंधान किया गया। पुलिस की एफआर को खारिज करते हुए अदालत ने गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही और जांच योग्य मामला माना। परिवादिया सरिता भटनागर ने वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल नाग के जरिए एफआर के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने अनुसंधान अधिकारी देवाराम गोदारा के खिलाफ लापरवाही और परिवादिया को विधिक क्षति पहुंचाने के आरोप में विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। निमोनिया की शिकायत पर कराया था भर्ती सरिता भटनागर के अनुसार, उनके पति प्रभास भटनागर (55) को 26 सितंबर 2020 को निमोनिया की शिकायत पर जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 27 अक्टूबर 2020 को उनकी मौत हो गई। परिवादिया ने आरोप लगाया कि रेजिडेंट डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही व उपेक्षापूर्ण व्यवहार के कारण मौत हुई। मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था और हालत गंभीर थी, इसके बावजूद उचित देखभाल नहीं की गई। मरीज को देखने से मना करने का आरोप गवाहों ने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर मरीज को देखने से इनकार किया। लगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर के खाली होने और मास्क हटाने के भी आरोप है। परिजन के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की बात भी सामने आई है। आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज तक जब्त नहीं किए और परिवादिया की शिकायत के बावजूद निष्पक्ष जांच नहीं की गई।