ट्रक की टक्कर से एक बुजुर्ग बुरी तरह घायल हुए थे। उनके सीने की पसलियां टूट चुकी थी। फेफड़ा पूरी तरह पिचक गया और डायफ्राम फटने से लीवर, आंतें और अन्य पेट के अंग सीने में पहुंच गए थे। अजमेर संभाग के सबसे बड़े जेएलएन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने करीब 5 घंटे तक एक साथ डायफ्राम हर्निया रिपेयर, एड्हीसियोलाइसिस और रिब फिक्सेशन जैसी तीन बड़ी सर्जरी कर उन्हें जीवनदान दिया। डॉक्टरों का दावा है कि एक ही मरीज में एक साथ तीनों ऑपरेशन करने का यह दुनिया का पहला अनूठा मामला हो सकता है। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के सामान्य सांस ले रहा है। उन्हें हॉस्पिटल से छुट्‌टी दे दी गई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अनिल सामरिया, हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे और उपाधीक्षक डॉ. अमित यादव ने आज इस सर्जरी की जानकारी दी। जांच में सामने आई अंदरूनी चोटों की तस्वीर सीटीवीएस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तेजकरण सैनी ने बताया- 17 जून को पीसांगन क्षेत्र के लामाना निवासी 53 साल के बुजुर्ग को गंभीर हालत में हॉस्पिटल लाया गया था। सीटी स्कैन और अन्य जांच में सामने आया कि मरीज की सातवीं से दसवीं पसली तक बुरी तरह टूट चुकी थीं। दाहिने फेफड़े में खून और हवा भरने से वह पूरी तरह पिचक गया था। सबसे गंभीर स्थिति यह थी कि सीने और पेट को अलग करने वाला डायफ्राम फट चुका था, जिससे लीवर, ओमेंटम और आंतें छाती में पहुंचकर फेफड़े और टूटी पसलियों से चिपक गई थीं। मरीज का ऑक्सीजन स्तर लगातार गिर रहा था। सीने में ट्यूब डालने के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी और वह 8 से 10 लीटर ऑक्सीजन सपोर्ट के बिना सांस नहीं ले पा रहा था। डॉक्टरों के अनुसार-तत्काल ऑपरेशन नहीं किया जाता तो मरीज को बचा पाना संभव नहीं था। ऑपरेशन थिएटर में 5 घंटे तक चली जिंदगी बचाने की जंग मरीज को 24 जून को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया था। इससे पहले तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीने में फंसे पेट के अंगों को सुरक्षित निकालकर वापस उनकी जगह पहुंचाना और फेफड़े को दोबारा सामान्य स्थिति में लाना था। पूरी प्रक्रिया चार से पांच घंटे तक चली। ऑपरेशन के बाद मरीज को चार यूनिट अतिरिक्त रक्त भी चढ़ाना पड़ा। सर्जरी के बाद मरीज को चार दिन (24 से 27 जून) तक सीटीवीएस आईसीयू में निगरानी में रखा गया। धीरे-धीरे फेफड़े ने सामान्य रूप से काम करना शुरू किया। अब मरीज स्वस्थ है। निजी हॉस्पिटल में 5 लाख तक खर्च, जेएलएन में मुफ्त मिला इलाज हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने बताया कि इस तरह की जटिल सर्जरी, आईसीयू, वेंटिलेटर और फिजियोथेरेपी सहित निजी हॉस्पिटल में इलाज कराने पर करीब चार से पांच लाख रुपए तक खर्च आता लेकिन मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत जेएलएन हॉस्पिटल में मरीज का पूरा इलाज, ऑपरेशन, दवाइयां और आईसीयू सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई। ट्रक के नीचे आने से गंभीर घायल थे बता दें कि पीसांगन क्षेत्र के लामाना निवासी 53 साल के बुजुर्ग शंकर 17 जून को अपनी बाइक से जा रहे थे। रास्ते में ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद वे ट्रक के नीचे फंस गए। इसके बाद भी ड्राइवर करीब 3 किमी तक घसीटता हुआ लेकर गया था। बुजुर्ग को गंभीर हालत में जेएलएन के ट्रोमा सेंटर लाया गया था।