अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मरीज के परिजनों का आरोप है कि पेट की बीमारी के चलते बुजुर्ग किसान को भर्ती करवाया गया था, हॉस्पिटल स्टाफ की लापरवाही से जांच रिपोर्ट बदल गई। जिससे डॉक्टरों ने किडनी की बीमारी की दवा दे दी। इससे भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा निवासी 66 वर्षीय किसान की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने उनकी जांच रिपोर्ट किसी अन्य महिला मरीज की रिपोर्ट से बदल दी। गलत रिपोर्ट से इलाज चलता रहा। हालत बिगड़ने के बाद भी समय पर ऑक्सीजन, ट्रॉली और आईसीयू की व्यवस्था नहीं हो सकी। परिजनों ने कोतवाली थाने में शिकायत देकर दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं जेएलएन हॉस्पिटल के अधीक्षक अरविंद खरे ने कहा- मरीज के परिजनों की शिकायत के बाद जांच कमेटी बनाई गई है। जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। गैस्ट्रोलॉजी की समस्या पर भीलवाड़ा से किया गया था रेफर मृतक किसान के मित्र धनराज ने बताया-भंवरलाल को पेट संबंधी बीमारी थी। महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा मे इलाज चल रहा था। 9 जुलाई को जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया था। दोपहर करीब तीन बजे उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर इलाज शुरू किया। पहली रात तबीयत सुधरी, अगले दिन अचानक बिगड़ने लगी हालत भंवरलाल के बेटे पप्पू लाल ने बताया- भर्ती होने के बाद रात तक मेरे पिताजी की तबीयत में काफी सुधार था। वे सामान्य बातचीत कर रहे थे और उन्हें दलिया व नारियल पानी भी दिया गया। डॉक्टरों ने उन्हें सामान्य वार्ड में भर्ती रखा। लेकिन 10 जुलाई की सुबह नया इलाज शुरू होने के बाद शाम तक उनकी मानसिक स्थिति बदलने लगी। वे परिजनों को पहचान नहीं पा रहे थे, बहकी-बहकी बातें करने लगे और रात में दर्द से तड़पते हुए बार-बार उठकर भागने की कोशिश कर रहे थे। परिजनों ने ड्यूटी स्टाफ को इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। रात दो बजे बेटे खोली फाइल, सामने आई बड़ी चूक पप्पू लाल ने बताया- रविवार रात करीब दो बजे बेड के पास रखी मेडिकल फाइल देखी तो मैं हैरान रह गया। फाइल में मेरे पिताजी की जांच रिपोर्ट के बजाय वार्ड में भर्ती एक युवती कोमल की रिपोर्ट लगी हुई थी। आरोप है कि उसी रिपोर्ट के आधार पर भंवरलाल को दवाइयां और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। परिजनों का कहना है कि गलत इलाज के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टर बदलते रहे बीमारी के कारण परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर अलग-अलग बीमारियां बताते रहे। सुबह एक डॉक्टर ने दिमाग में टीबी होने की आशंका जताते हुए रीढ़ की हड्डी से सैंपल लेने की बात कही। बाद में दूसरे डॉक्टर ने पेट का कैंसर होने की संभावना बताई। परिजनों का कहना है कि दोनों डॉक्टर गलत फाइल में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज कर रहे थे। ICU शिफ्ट करने में देरी, खाली निकला ऑक्सीजन सिलेंडर परिजनों के मुताबिक 12 जुलाई की रात भंवरलाल की हालत बेहद गंभीर हो गई। उन्होंने बार-बार स्टाफ से आईसीयू में शिफ्ट करने और बलगम साफ कराने की गुहार लगाई, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं मिली। परिजनों को खुद ट्रॉली तलाशनी पड़ी, जिसमें करीब 20 मिनट लग गए। इसके बाद जो ऑक्सीजन सिलेंडर लाया गया, वह भी खाली निकला। दूसरा सिलेंडर लाने और मरीज को इमरजेंसी से आईसीयू तक पहुंचाने में और समय लग गया। वार्ड में पहुंचने से पहले ही भंवरलाल ने दम तोड़ दिया। आईसीयू में ईसीजी करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने दी शिकायत पप्पू लाल ने कोतवाली थाने में शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल की लापरवाही से चली गई। दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ ऐसी घटना न हो। --- ये खबर भी पढ़ें… मेडिकल स्टोर पर इलाज के दौरान युवक की मौत:भाई बोला- गलत इंजेक्शन लगाने से जान गई, डॉक्टर फरार बाड़मेर में मेडिकल स्टोर पर इलाज के दौरान एक युवक की ज्यादा तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस दौरान झोलाछाप डॉक्टर वहां से भाग गया। परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। घटना बाड़मेर शहर के थार हॉस्पिटल के पास की गली हरियाणा नागल मेडिकल स्टोर पर शाम करीब 8 बजे की है। (पूरी खबर पढ़ें)