अजमेर की पोक्सो कोर्ट संख्या-एक ने मासूम बालिका (5) के साथ रेप करने वाले आरोपी कथित भाई को आजीवन कठोर कारावास और 20 हजार रुपए के जुर्मान की सुनाई। साथ ही कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने तल्ख टिप्पणी भी की। विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने कहा- एक मासूम बच्ची, जो अपने भाई पर विश्वास करती थी। उसके साथ इस तरह की शारीरिक और मानसिक क्रूरता करना मानवीय संवेदनाओं की हत्या है। ऐसे अपराधी समाज में किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। यह विश्वासघात व क्रूरता की पराकाष्ठा है। मामले के अनुसार- 9 जुलाई 2024 को पिता ने संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 8 जुलाई की शाम 5 बजे मासूम घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी तो हमने तलाश किया। ढूंढते हुए रास्ते में एक लड़की ने बताया कि झाड़ियों में एक बच्ची रो रही है। जाकर देखा तो बच्ची मिली। उसे जेएलएन हॉस्पिटल लेकर आए। वहां बच्ची ने बताया कि उसके साथ रेप हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट में घटना की पुष्टि हुई। प्रकरण मे अभियोजन पक्ष की ओर से 23 गवाह और 44 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। जज बोले- मासूम के मन पर कभी न मिटने वाली छाप पोक्सो कोर्ट संख्या-1 अजमेर के विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने आदेश में लिखा- 5 वर्ष की बच्ची के साथ ऐसा घिनौना कृत्य किया गया है। जो उसे भाई कहती थी, उस पर विश्वास करती थी तथा उसे अपना हितैषी समझती थी। ऐसे जघन्य अपराध के लिए आरोपी को कठोरतम दंड दिया जाना हर दृष्टिकोण से पूरी तरह न्यायसंगत और अनिवार्य होगा। विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने कहा- इस उम्र में बच्ची को जो असहनीय शारीरिक पीड़ा, ब्लीडिंग और गंभीर चोटें आई हैं। वे उसके कोमल शरीर और मन पर कभी न मिटने वाली छाप छोड़ देती हैं। इस भयानक आघात की भरपाई केवल कानून के कड़े से कड़े रुख द्वारा ही संभव है। समाज में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र और न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। जब तक ऐसे जघन्य कृत्यों के लिए कठोरतम सजा नहीं दी जाएगी, तब तक समाज में अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा नहीं होगा। कड़ी सजा अन्य संभावित अपराधियों के लिए कड़ा सबक भी बनेगी। पोक्सो जैसे कड़े कानूनों का उ‌द्देश्य ही यही है कि मासूमों को सुरक्षा मिले और उनके परिजनों का कानून पर विश्वास बना रहे। ऐसे मामलों में कठोर सजा देना, समाज के नैतिक ताने-बाने को बचाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। कोर्ट ने पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत कुल 6 लाख रुपए की प्रतिकर राशि दिलाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी पोक्सो कोर्ट संख्या-एक के विशिष्ठ लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने की।