आदर्श क्रेडिट सोसायटी घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी सोसायटी के परिसमापन (Liquidation) और निवेशकों को राशि लौटाने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी और उसे तेज करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। कमेटी को इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट 5 अगस्त को सौंपनी होगी। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान माना कि यह मामला बेहद बड़े स्तर के कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ा है। निवेशकों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह करीब 10 हजार करोड़ रुपए के मूलधन और लगभग 15 हजार करोड़ रुपए के ब्याज सहित कुल करीब 25 हजार करोड़ के घोटाले का मामला है। देशभर के करीब 20 लाख निवेशक वर्ष 2018 से अपनी गाढ़ी कमाई वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने इस मामले को एक सुनियोजित 'व्हाइट कॉलर' अपराध बताते हुए कहा कि ऊंची ब्याज दरों का लालच देकर जमा राशि जुटाई गई और कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए इस धन को रियल एस्टेट में डायवर्ट (निवेश) किया गया। ऑफिशियल लिक्विडेटर एच.एस. पटेल ने कोर्ट को बताया कि पिछले आठ साल से निवेशकों को कोई राशि वापस नहीं मिल सकी है। सीमित संसाधनों और केवल एक कर्मचारी के साथ काम करने के कारण परिसमापन (लिक्विडेशन) प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की कार्रवाई तथा विभिन्न अदालतों के अंतरिम आदेशों के चलते कुर्क की गई संपत्तियों की बिक्री और नीलामी भी अटकी हुई है। कोर्ट को बताया- 5000 करोड़ की प्रॉपर्टी भी कुर्की के दायरे में कोर्ट को बताया गया कि करीब 5000 करोड़ रुपए के अनुमानित बाजार मूल्य वाली संपत्तियां कुर्की के दायरे में हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि निवेशकों में गरीब लोग, पेंशनर्स और ऐसे आम लोग शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई और रिटायरमेंट का पैसा इसमें जमा कराया था। कई निवेशक आज इलाज, शादी-ब्याह और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए पैसों की किल्लत से जूझ रहे हैं। मामले की जटिलता को देखते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जोधपुर) और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (गांधीनगर) को भी इस समिति को शोध और अकादमिक सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के तहत ऑफिशियल लिक्विडेटर को 5 अगस्त को समिति के अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर प्रारंभिक जानकारी देनी होगी। समिति अपनी आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और अधिवक्ताओं (वकीलों) की मदद ले सकेगी। केंद्र सरकार को समिति के लिए आवश्यक कार्यालय, लॉजिस्टिक और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, पूर्व प्रबंधन और शेल कंपनियों के पक्ष में दिए गए सभी अंतरिम आदेशों को समाप्त कर दिया गया है। समिति की पहली बैठक 5 अगस्त को होगी।