डीडवाना-कुचामन जिले की मौलासर तहसील के अलखपुरा गांव में एक सेवानिवृत्ति समारोह सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन गया। राजकीय विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक इकबाल मोहम्मद खान ने अपनी 33 साल 6 माह की सेवा पूरी होने पर स्कूल परिसर में अपने निजी खर्च से मां सरस्वती का मंदिर बनवाया और विद्यालय को समर्पित किया। उनके इस निर्णय की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। इस समारोह में अलखपुरा सरपंच श्रवणराम बिजारणिया, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, पूर्व विद्यार्थी, शिक्षक और आसपास के गांवों से आए सैकड़ों लोग शामिल हुए। लगभग 3 घंटे तक चले इस कार्यक्रम में सभी ने इकबाल मोहम्मद खान के व्यक्तित्व, कार्यशैली और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण की प्रशंसा की। पूरे सेवाकाल में नहीं लिया अवकाश स्कूल के प्रिंसिपल संजीव शर्मा ने बताया कि इकबाल मोहम्मद खान का कार्यकाल अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में कभी अवकाश नहीं लिया। वे हमेशा समय से पहले विद्यालय पहुंचते थे और विद्यालय समय समाप्त होने के बाद भी बच्चों व विद्यालय के कार्यों में जुटे रहते थे। इकबाल मोहम्मद खान ने विद्यालय के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने भामाशाहों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विद्यालय का मुख्य द्वार बनवाया, बच्चों के लिए झूले लगवाए और उत्कृष्ट खेल मैदान के विकास में अहम भूमिका निभाई। विद्यालय में उनसे वरिष्ठ पदों पर प्रधानाचार्य और व्याख्याता होने के बावजूद सभी शिक्षक और विद्यार्थी उन्हें सम्मानपूर्वक "हेड सर" कहते थे। स्कूल के विकास को दी सर्वोच्च प्राथमिकता निंबी कला गांव निवासी इकबाल मोहम्मद खान ने अपने सेवाकाल के दौरान जहां भी पदस्थापित रहे, वहां शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और विद्यालय के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। सेवानिवृत्ति पर मां सरस्वती का मंदिर बनवाकर उन्होंने न केवल अपनी सेवा को यादगार बनाया, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और भारतीय संस्कृति के साझा मूल्यों का भी प्रेरक संदेश दिया।