भास्कर न्यूज | अलवर सरिस्का के अलवर बफर जोन में वन विभाग की ओर से तैयार किए गए नए ट्रैक ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आड़ा पाड़ा से अंधेरी होते हुए सूरजकुंड के रास्ते बाला किला तक बनाए गए इस मार्ग को लेकर पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार ट्रैक निर्माण के दौरान हजारों हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। इतना ही नहीं, करीब 400 साल पुराने बाला किला के मजबूत परकोटे (सुरक्षा दीवार) को भी तोड़ दिया गया, जो अलवर की ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा है। लोगों का कहना है कि दीवार पूरी तरह सुरक्षित थी, इसके बावजूद इसे हटाया गया। नागरिकों ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि रियासतकालीन समय में बने कई पारंपरिक रास्ते आज भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन उन पर सुधार कार्य नहीं किया गया। इसके बजाय नया रास्ता बनाकर जंगल और विरासत दोनों को नुकसान पहुंचाया गया। सुबह घूमने आने वाले लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे गलत निर्णय बताया है। अलवर विकास समिति के राजेश जोशी सहित अन्य लोगों ने कड़ा विरोध जताया है। इनका कहना है कि अब मामले में तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ते हुए फोटो, पुराने रिकॉर्ड और नक्शे जुटाए जा रहे हैं। यह भी जानकारी लेकर यह स्पष्ट किया जाएगा कि ट्रैक निर्माण, पेड़ों की कटाई और दीवार से जुड़ी कार्रवाई किन नियमों और अनुमति के आधार पर की गई। इधर, वन विभाग ने आरोपों को खारिज किया है। बफर रेंजर शंकर सिंह शेखावत का कहना है कि जिस दीवार को तोड़ने की बात कही जा रही है, वह पहले से क्षतिग्रस्त थी। जो रास्ता बनाया गया है वह सफारी ट्रैक नहीं, बल्कि प्रोटेक्शन ट्रैक है, जिसे बाघिन एसटी-2302 और उसके दो शावकों की मूवमेंट के चलते निगरानी के लिए बनाया गया है। रेंजर के मुताबिक, बारिश में बाला किला का मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण वैकल्पिक रास्ते के रूप में इस ट्रैक को तैयार किया गया। यह सफारी में उपयोग नहीं होगा।