अलवर| जिला अस्पताल में नए बन रहे ट्रॉमा सेंटर के लिए आरएमएससीएल से 5 अत्याधुनिक सोनोग्राफी मशीनें मिलीं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। ट्रॉमा सेंटर अधूरा होने के कारण 3 मशीनें सामान्य अस्पताल और 2 जनाना अस्पताल में शिफ्ट की गई हैं। इसके बावजूद मरीजों को राहत नहीं मिल रही। सोमवार को सामान्य मरीजों को सोनोग्राफी के लिए 27 अप्रैल की तारीख दी गई, यानी करीब 20 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं लंबी वेटिंग के कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों को या तो कई दिन बाद की तारीख लेकर लौटना पड़ता है या फिर निजी सेंटरों पर महंगी जांच करवानी पड़ती है। रोज 300 मरीजों को जांच की जरूरत अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 3000 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें 250-300 मरीजों को सोनोग्राफी की सलाह मिलती है, लेकिन केवल 140-150 जांच ही हो पा रही हैं। फिलहाल चार मशीनें संचालित हैं, जिन्हें सिर्फ तीन डॉक्टर डॉ. श्रीराम कडवासरा, डॉ. श्याम मोहन गोयल और डॉ. गौरव भट्टाचार्य संभाल रहे हैं। ये सभी डिप्लोमाधारी हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पताल में एक भी एमडी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। डॉक्टरों की कमी के चलते छुट्टी या कोर्ट पेशी के समय मशीनें बंद तक करनी पड़ती हैं। जनाना में विकल्प लेकिन समन्वय की कमी नियमों के अनुसार सोनोलॉजिस्ट की कमी होने पर पंजीकृत गायनी डॉक्टर भी गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी कर सकते हैं। अन्य अस्पतालों में यह व्यवस्था लागू है, लेकिन जनाना अस्पताल में गायनी डॉक्टर इस जिम्मेदारी से दूरी बनाए हुए हैं। यदि वे यह जिम्मेदारी संभाल लें, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों को सामान्य अस्पताल में लगाया जा सकता है और वेटिंग लिस्ट कम हो सकती है। वेटिंग कम करेंगे बेहतर व्यवस्थाओं के लिए सोनोग्राफी मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण हो रही बैठक में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने और वेटिंग कम करने के लिए कड़े निर्देश दिए जाएंगे ताकि आम मरीजों को समय पर जांच का लाभ मिल सके। - डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक जनस्वास्थ्य