अलवर शहर में 'मंथली' वसूली के खिलाफ बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर्स ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस के रवैये से नाराज करीब 68 सप्लायर्स ने काम पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे शहर में रोड़ी और बजरी की सप्लाई ठप हो गई है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह अवैध वसूली तुरंत बंद नहीं हुई, तो वे अलवर से जयपुर तक पैदल मार्च करेंगे। सप्लायर्स का आरोप है कि रॉयल्टी चुकाने के बावजूद पुलिस मनमाने तरीके से गाड़ियां रोकती है। पहले जहां 1 से 2 हजार रुपये 'मंथली' ली जाती थी, उसे अब बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दिया गया है। इस वसूली का सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। इस मामले में अलवर पुलिस एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि वैशाली नगर थाने के कांस्टेबल अजीत को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच एएसपी दीपक कुमार को सौंपी गई है। अब एएसपी दीपक कुमार मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 1400 रुपए की बजरी 1800 रुपये में बेचने को मजबूर व्यापारियों का कहना है कि पुलिस की इस अवैध वसूली के कारण उन्हें रोड़ी और बजरी 5 से 10 रुपये प्रति फुट महंगी बेचनी पड़ रही है। यदि यह वसूली बंद हो जाए, तो जो बजरी अभी 1800 रुपये प्रति टन मिल रही है, वह आमजन को 1400 रुपये प्रति टन में आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती है। बिल्डिंग सप्लायर योगेश सैनी ने कहा- पुलिस की मंशा सिर्फ मंथली वसूलने की है। अब स्टॉक की अलग और हर ट्रैक्टर के हिसाब से 2 से 5 हजार रुपये मंथली मांगी जा रही है। पहले किसी एक थाने को ही पैसे देने पड़ते थे, लेकिन अब अलवर में 15 से ज्यादा थाने हो गए हैं और हर जगह वसूली हो रही है। क्रेशर से माल लाने वाली गाड़ी को थानों में 5 हजार रुपये देने पड़ते हैं। ‘रॉयल्टी देने के बाद भी ओवरलोड के नाम पर पुलिस करती है परेशान’ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे पुष्पेंद्र चौधरी ने बताया कि सप्लायर्स पूरी तरह कानूनी (लीगल) तरीके से रॉयल्टी देकर माल लाते हैं, इसके बावजूद पुलिस गाड़ियां पकड़ लेती है। ओवरलोड पकड़ने के पीछे पुलिस की असली मंशा सिर्फ वसूली की होती है। स्टॉक पर माल खाली करने वाले ट्रैक्टर चालकों को भी पुलिस नहीं छोड़ती। शहर के 65 से अधिक सप्लायर्स के पास 8 से 10 लोग काम करते हैं, जिनकी आजीविका अब काम बंद होने से संकट में आ गई है। अब तो मिट्टी के ट्रैक्टरों से भी मांग रहे पैसे: पीड़ित बोले ट्रैक्टर ड्राइवर राजेंद्र सूद ने कहा- मैं मिट्टी का ट्रैक्टर चलाता था। पहले मिट्टी पर कोई मंथली नहीं ली जाती थी, लेकिन अब हर थाने से 5 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। तंग आकर मैंने अपना ट्रैक्टर घर पर ही खड़ा कर दिया है। उपकार यादव ने कहा- हमारा व्यापार जीरो मार्जिन पर आ गया है। हमने सप्लाई इसलिए रोकी है ताकि सोता हुआ प्रशासन जागे। लखन शर्मा ने कहा- इस लड़ाई में आमजन को भी हमारा साथ देना चाहिए, क्योंकि पुलिस की वसूली बंद होने पर ही उन्हें सस्ता निर्माण मटेरियल मिल पाएगा।