मंगलवार रात को अलवर शहर और आसपास के इलाकों में अचानक बारिश होने से किसानों की गेहूं में कटी-कटाई फसल भीग गई। बहुत से किसानों की तूड़ी पर पानी फिर गया। जिसे अब सुखाने में किसानों को पसीने आएंगे। फिर भी गेहूं व तूड़ी की क्वालिटी खराब होने का पूरा डर है। मतलब किसानों की पकी-पकाई फसल पर आखिरी में पानी फिर गया। काफी नुकसान हुआ है। इससे पहले मार्च व अप्रेल के महीेन में दो-तीन बारिश और कई जगहों पर ओले गिरने से काफी नुकसान हो चुका था। 40 प्रतिशत किसानों की फसल खेतों में जिले में अभी करीब 30 से 40 प्रतिशत गेहूं की फसल खेतों में है। ज्यादातर फसल कटी हुई पड़ी है। 70 प्रतिशत किसानों ने खेती निकाल कर घर में रख ली। लेकिन गेहूं के काफी किसानों की फसल की कटाई चल रही है। कुछ की खेतों में पड़ी है। इस कटी कटाई फसल में ऊपर से पानी गिरने से फसल भीग जाती है। फिर किसानों को उसे वापस धूप में सुखाना पड़ता है। पूरी तरह सूखने के बाद ही फसल निकाली जा सकती है।यह सब करने में फसल के दाने जमीन पर बिखर जाते हैं। कुछ गुणवत्ता भी कमजोर होती है। आगे फिर बारिश होने पर और अधिक खराबे की आशंका रहती है। किसानों की भागदौड़ व परेशानी अलग से होती है। दो-तीन बार ओलों से नुकसान मार्च महीने में दो बार ओले गिर चुके हैं। जिससे फसल में काफी जगहों पर नुकसान हुआ था। फरवरी के महीने में भी बारिश हुई थी। कुछ जगहों पर ओले गिरे थे। अब अप्रेल के महीने में दो बार बारिश हो गई। कई जगहों पर हल्के ओले गिरे हैं। जिसके कारण फसल में खराबा कई बार में हुआ है। जिन फसलों का बीमा है उनको बीमाकंपनी से कुछ राहत मिल सकती है। सरकार की तरफ से मुआवजा 33 से 50 प्रतिशत से अधिक फसल खराबे पर ही मिलता है। उतना नुकसान कहीं बताया नहीं गया।