राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग का किडनैप और गैंगरेप के मामले में चार आरोपियों की सजा रद्द कर उन्हें बरी कर दिया है। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह फैसला सोनू उर्फ सावन सुवालिया व 3 अन्य की याचिका पर दिया हैं। चारों को अलवर की पॉक्सो कोर्ट ने 2 जून 2023 को जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपियों ने इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। DNA रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी उठाए सवाल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में उम्र के अलावा एफआईआर दर्ज होने की परिस्थितियों, पीड़िता के बयानों, मेडिकल सबूतों और DNA रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 14 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं 26 अक्टूबर को फैसले का ऑपरेटिव पार्ट सुनाते हुए आज डिटेल फैसला जारी किया गया। करीब 7 साल पहले हुई थी घटना अलवर जिले के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले के अनुसार-27 सितंबर 2019 की रात करीब साढ़े 10 बजे चार आरोपी पीड़िता को उसके घर से अपनी कार में ले गए थे। पहले गांव के पास बने एक बाड़े में और फिर गांव की नदी के पास सुनसान जगह पर ले जाकर गैंगरेप किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि घटना का वीडियो वायरल करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार- घटना के बाद उसे घर के पास छोड़ दिया गया। उसके बाद वह पुलिस चौकी पहुंची और शिकायत दर्ज करवाई थी।