2 मई को अलवर शहर में स्कीम दस मोड़ पर कार की टक्कर से 7वीं कक्षा की छात्रा की मौत के बाद प्रशासन ने उस जगह दो ब्रेकर बनाए हैं। ब्रेकर भी आधे अधूरे बना दिए। सफेद पट्टी तक नहीं है। इस तरह के ब्रेकर से एक्सीडेंट कम होने की कोई गारंटी नहीं है। उल्टा वाहन चालकों की परेशानी बढ़ी है। जिससे जाहिर है कि मौत के बाद भी अलवर यूआईटी प्रशासन आधा अधूरा जागा है। अलवर शहर में इसी तरह रोड क्रॉस करते समय पिछले करीब डेढ़ साल में 4 जनों की मौत होने पर भी प्रशासन गंभीर नहीं हुआ है। जब भी किसी की मौत होती है उसके बाद ब्रेकर बनाए जाते हैं। कुछ दिनों के बाद वह ब्रेकर भी आधा रहता है। सफेद पट्टी तक नहीं की जाती है। जिसके कारण वाहन चालकों की परेशानी बढ़ती है। वहीं एक्सीडेंट भी कम नहीं हो पाते हैं। केवल दिखावे मात्र की कार्यवाही की जाती है। सबसे ताजा उदाहरण 2 मई का है। अलवर शहर में स्कीम 10 जैन मंदिर मोड़ पर 7वीं कक्षा की छात्रा छवि की की मौत हो गई। वह ईरिक्शा में बैठी थी। रोड क्रॉस करते समय कार ने ईरिक्शा को टक्कर दी। जिससे रिक्शा पलट गया। छात्रा रिक्शा के नीचे दब गई। उसके सिर में गंभीर चोट लगने से दम तोड़ दिया। उसके अगले दिन यूआईअी प्रशासन ने दोनों तरफ एक-एक ब्रेकर बना दिया। उसे बनाते समय भी भारत परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइन का बिल्कुल ख्याल नहीं रखा गया। ब्रेकर पर सफेद पट्टी तक नहीं की। जिससे हादसे रुकने की कोई गारंटी नहीं है। उल्टा हर मिनट में 50 से 100 व्हीकल झटके से गिरते हैं। 31 जुलाई 2024 को 60 फीट रोड पर 8 साल की छात्रा दिव्या साहू को ट्रैक्टर ने कुचल दिया था। छात्रा की मौत के बाद वहां ब्रेकर बनाए। 23 जून 2025 शिवाजी पार्क मोड़ पर कार ने बाइक को कुचला। पति-पत्नी की मौत हो गई थी। वहां भी अगले दिन ब्रेकर बनाए। किसी भी जगह ब्रेकर नियम के अनुसार नहीं बनाए गए। ई-रिक्शा के नीचे दबी स्कूली छात्रा की मौत, VIDEO:कार ने टक्कर मारी, उछलकर नीचे गिरी; बड़ी बहन के साथ घर जा रही थी