आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने सोमवार को प्रदेशस्तरीय आंदोलन के तहत रैली निकालकर मिनी सचिवालय पर दो घंटे प्रदर्शन किया। हड़ताल के कारण सोमवार को जिले की 1537 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके रहे। स्थाई कर्मचारी का दर्जा ​देने और उचित मानदेय सहित 19 मांगों को लेकर चल रहे इस आन्दोलन के कारण पोषाहार वितरण व्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदेशस्तरीय आंदोलन के तहत सोमवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर जमा हुई। यहां रैली निकालकर मिनी सचिवालय पर 2 घंटे प्रदर्शन किया। उन्होंने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी । कार्यकर्ताओं का कहना था कि मानदेय कम से कम 25 हजार रुपए किया जाए। आंदोलन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष मंजू कारपेंटर ने किया। पिछले छह वर्षों में राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय करीब 43% बढ़ोत्तरी हुई। लेकिन इसी दौरान खुदरा महंगाई भी करीब 43% बढ़ गई। जबकि उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं। इसी कारण देश के अलग-अलग राज्यों में हुए अध्ययनों में लगभग एक जैसी तस्वीर सामने आई। जिनके अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सिर्फ कम मानदेय से नहीं, बल्कि बढ़ते कार्यभार, रिकॉर्ड और डिजिटल रिपोर्टिंग के दबाव, संसाधनों की कमी और समय पर भुगतान नहीं होने जैसी समस्याओं से भी जूझ रही हैं। प्रदर्शन के कारण जिले में 1537 आंगनबाड़ी केंद्र पर ताले लगे रहे। करीब 35 हजार बच्चों का पोषाहार और प्री-स्कूल गतिविधियां ठप हैं। 1 से 7 जुलाई तक प्रवेशोत्सव थे। जबकि 15 हजार गर्भवती व धात्री महिलाओं तक पहुंचने वाली पोषण, वजन मापन, स्वास्थ्य निगरानी और अन्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। संघ जिलाध्यक्ष कारपेंटर ने बताया कि 4 जून को निदेशालय पर घेराव-प्रदर्शन प्रस्तावित था। विभाग ने 2 जून को विश्वास दिलाया था कि 15 दिन में बकाया भुगतानों का निस्तारण होगा। नियमिती करण, मानदेय में बढ़ोतरी, ग्रेच्युटी व पेंशन नीति को लेकर निर्णय होंगे । लेकिन एक महीने बाद भी विभाग ने सुध नहीं ली।