बंगाल की खाड़ी से उठा खतरनाक समुद्री तूफान (चक्रवात) 'अर्नब' तेजी से राजस्थान की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से तेज हवा के साथ बारिश की आशंका है। तीन साल पहले भी राजस्थान में ‘बिपरजॉय’ तूफान ने भयंकर तबाही मचाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तूफान में 8 जानें गई थीं। अब एक बार फिर वैसे ही तूफान का खतरा मंडरा रहा है। क्या ये ‘बिपरजॉय’ से भी ज्यादा खतरनाक होगा? राजस्थान में इस तूफान का कहां-कहां और क्या असर होगा? आखिर करीब 1500 किलोमीटर की दूरी से ये तूफान रेगिस्तान में बारिश कैसे लाएगा? आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में ऐसे ही सवालों के जवाब जानेंगे…. सवाल - 1 : तूफान अर्नब अभी कहां है और राजस्थान पर क्या असर डालेगा? जवाब: 25 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना। 26 अक्टूबर को यह सिस्टम तेजी से मजबूत हुआ और इसने चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का रूप ले लिया जो देखते ही देखते 'चक्रवाती' तूफान बन गया। 27 अक्टूबर को इसने चक्रवाती तूफान का रूप ले लिया।मौसम विभाग के मुताबिक 28 अक्टूबर को यह दक्षिण भारत के आंध्रप्रदेश तट से टकरा गया है। राजस्थान तक असर : चक्रवात का असर आंध्र तट से आगे बढ़कर ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के राज्यों तक फैलेगा। 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश से सटे राजस्थान के कई जिलों में इस तूफान का असर देखने को मिलेगा। सवाल- 2 : राजस्थान में 3 साल पहले तबाही मचाने वाले बिपरजॉय से कितना ज्यादा खतरनाक है अर्नब? जवाब : अर्नब से पहले आए चक्रवाती तूफान बिपरजॉय ने राजस्थान कई इलाकों में तबाही मचाई थी। दोनों की रफ्तार और संभावित खतरे को इस तुलना से समझा जा सकता है…. बिपरजॉय: जून 2023 में गुजरात के रास्ते राजस्थान आए इस तूफान ने 5 दिन तक कहर बरपाया था। बाड़मेर, जालोर, जोधपुर, पाली, राजसमंद जैसे कई जिलों में बाढ़ के हालात हुए थे। जालोर के सांचौर में तो 15 मिनट मूसलाधार बारिश से कॉलोनियां डूब गई थीं। जोधपुर में ट्रेन की पटरियां तक झूल गई थी। दर्जनों ट्रेनें-फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ी थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में तूफान की वजह से 8 मौतों का दावा भी है। अर्नब : ये तूफान 26 अक्टूबर 2026 को बंगाल की खाड़ी से उठा है। अभी प्रचंड चक्रवाती तूफान में बदल गया है। इसकी रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा है लेकिन झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक के महसूस हो रहे हैं। बिपरजॉय तूफान से अर्नब की तुलना : बिपरजॉय ज्यादा ताकतवर था। क्योंकि ये तूफान सीधा गुजरात तट से टकराने के बाद राजस्थान ही आया था, इसलिए भारी बारिश लाया था। अर्नब करीब 1500 किलोमीटर की दूरी पर टकराएगा। इसकी रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। दूसरा- यह तूफान सीधा राजस्थान प्रवेश नहीं कर रहा। एक्सपर्ट के मुताबिक इससे राजस्थान में भारी तबाही नहीं, बल्कि मौसम में अचानक बदलाव होने की आशंका है। सवाल - 3 : राजस्थान में कहां-कहां असर रहेगा, कौनसे जिले अलर्ट पर हैं? जवाब : मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के मुताबिक, 28 अक्टूबर तक प्रदेश में मौसम साफ रहेगा, लेकिन 29 अक्टूबर से सिस्टम बदलेगा। अर्नब के प्रभाव से राज्य के अधिकांश भागों में आगामी दिनों में पूर्वी हवा सक्रिय होने तथा 29-30 अक्टूबर को एक पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होने की संभावना है। 29-30 अक्टूबर: पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर संभाग के कुछ भागों में तेज हवा 30-40 प्रति घंटे के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर संभाग के पूर्वी भागों में भी कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि, सीमावर्ती क्षेत्र के अधिकांश भागों में मौसम साफ रहने की संभावना है। नुकसान क्या हो सकता है? : तूफान के असर से प्रभावित जिलों में तेज हवा से कच्चे मकानों की टिन शेड उड़ सकती है, होर्डिंग गिर सकते हैं, बिजली के खंभे झुक सकते हैं। खेतों में कटी हुई फसलें भीग सकती है। सवाल - 4 : राजस्थान में पहले कौन से तूफान आए हैं और तूफान कितना खतरनाक है ये कैसे तय होता है? जवाब : राजस्थान समुद्र से दूर है, लेकिन पिछले सालों में कई तूफानों का असर यहां तक पहुंचा है। बिपरजॉय: 6 से 19 जून 2023, अत्यंत प्रचंड, 165 किलोमीटर प्रति घंटा, गुजरात और राजस्थान में असर। नाम बांग्लादेश ने दिया। असना: 25 अगस्त से 2 सितंबर 2024, चक्रवाती तूफान, 75 किलोमीटर प्रति घंटा, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश में असर। नाम पाकिस्तान ने दिया। 1976 के बाद अगस्त में अरब सागर में बना यह पहला चक्रवाती तूफान था और यह जमीन पर बने डिप्रेशन से बना था। इस तूफान की वजह से राजस्थान में अगस्त में भारी बारिश हुई थी। सवाल - 5: चक्रवात क्या होते हैं और ये बनते कैसे हैं? जवाब: साइक्लोन शब्द ग्रीक भाषा के साइक्लोस से लिया गया है, जिसका मतलब है सांप की कुंडलियां। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में ट्रॉपिकल साइक्लोन समुद्र में कुंडली मारे सांप जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए ये नाम पड़ा। ये गोलाकार तूफान होते हैं जो गर्म समुद्र के ऊपर बनते हैं। बनने की प्रक्रिया कुछ ऐसी है - समुद्र के पानी का तापमान 25-26 डिग्री से ज्यादा होने पर उसके ऊपर की हवा गर्म और नम होकर ऊपर उठती है। नीचे की जगह खाली होने से कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है। इस खाली जगह को भरने के लिए आसपास की ठंडी हवा आती है और वह भी गर्म होकर ऊपर उठती है। ये साइकल चलता रहता है, बादल बनते हैं और तूफान का चक्र बन जाता है। धरती के घूमने के साथ यह चक्र भी घूमता है। तेजी से घूमने से बीच में आंख बनती है, जो सबसे शांत इलाका होता है और आंख की दीवार सबसे खतरनाक होती है, वहीं, सबसे तेज हवा और बारिश होती है। हवा की रफ्तार 62 किलोमीटर प्रति घंटा तक ट्रॉपिकल स्टॉर्म और 120 किलोमीटर प्रति घंटा पहुंचने पर चक्रवात बन जाता है। सवाल - 6: इस चक्रवात का नाम अर्नब क्यों रखा गया और किसने रखा? जवाब : अर्नब नाम बांग्लादेश ने दिया है। बांग्ला भाषा में अर्नब का मतलब होता है - समुद्र या विशाल महासागर। आखिर तूफान के नाम कैसे रखे जाते हैं? …. ये एक्सप्लेनर भी पढ़िए… सरपंच और प्रधान कौन बन पाएंगे:शौचालय नहीं तो नहीं लड़ पाएंगे चुनाव! 2 से ज्यादा बच्चे और 8वीं फेल का क्या होगा? जानिए-क्या दस्तावेज चाहिए सरपंच बनने के लिए आपको सबसे पहले इन 4 बातों का सबसे ज्यादा ख्याल रखना है। इन 4 बिंदुओं में फिट होने की स्थिति में ही आप आवेदन के लिए अपनी तैयारी शुरू कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…