राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने दो दिवसीय जैसलमेर दौरे के दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने नवरात्र की अष्टमी के पावन अवसर पर माता के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान गहलोत ने मंदिर परिसर में मन्नत का रुमाल भी बांधा। तनोट माता मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच मन्नत का रुमाल बांधने की विशेष मान्यता है। मान्यता के अनुसार, भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की आस में मंदिर परिसर में रुमाल बांधते हैं। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में ऐसे रुमाल बंधे हुए हैं। गहलोत के रुमाल बांधने का दृश्य भी इस दौरान चर्चा का विषय रहा। हालांकि, उन्होंने अपनी किसी व्यक्तिगत मनोकामना का उल्लेख नहीं किया।पूर्व सीएम द्वारा रुमाल बांधने के बाद राजनीतिक और स्थानीय गलियारों में इस बात की चर्चा है कि उन्होंने भी माता के दरबार में अपनी कोई विशेष मुराद मांगी है। X पर पोस्ट कर साझा किए दर्शन के अनुभव अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मंदिर दर्शन की जानकारी साझा करते हुए लिखा, "पहले दिन वे नवरात्र की अष्टमी के पावन अवसर पर जैसलमेर में तनोट माता के दर्शन किए और प्रदेश की खुशहाली व सभी के सुख-समृद्धि की कामना की।" गहलोत के मंदिर पहुंचने के दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, पूर्व विधायक रूपा राम धनदेव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर सहित कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। अटूट आस्था का केंद्र है तनोट माता धाम जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित तनोट माता मंदिर को 'थार की वैष्णो देवी' और 'सैनिकों की देवी' के नाम से जाना जाता है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सीमा पर हुए भीषण युद्ध में पाकिस्तानी सेना द्वारा गिराए गए सैकड़ों बम इस मंदिर परिसर में बेअसर रहे थे, जिसके बाद से इस मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल (BSF) संभालती है। नवरात्र के दौरान यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। पूर्व सीएम का यह दौरा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के साथ-साथ क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।