हर महीने 15 हजार रुपए कमाने वाले बालोतरा जिले के जूती (जूते) कारीगर को तमिलनाडु से 6.79 करोड़ का जीएसटी नोटिस मिला है। नोटिस मिलते ही गुड़ामालानी जीनगर मोहल्ला निवासी जितेंद्र कुमार पुत्र महादेवराम जीनगर के पैरों तले जमीन खिसक गई। जितेंद्र कुमार चमड़े की जूती बनाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि पीएम आवास योजना के तहत वह एक कमरा बनवा रहे हैं। उनका परिवार फिलहाल पड़ोस में भाई के घर रह रहा है। घर में महज कुछ बर्तन और घरेलू सामान ही है। पीड़ित जितेंद्र ने बताया- मेरा बैंक अकाउंट बंद होने पर 25 जुलाई को SBI गुड़ामालानी गया था। तब बैंक स्टाफ ने कहा था कि 28 जुलाई को आना चेक करेंगे कि अकाउंट किस वजह से बंद हुआ है। 28 जुलाई को दोबारा बैंक जाने पर उन्होंने मुझे जीएसटी वाला नोटिस दिया। कहा- जीएसटी का बकाया है, इस वजह से अकाउंट बंद किया हुआ है। पीड़ित ने मामले की लिखित सूचना गुड़ामालानी थाने में दी, जहां से उन्हें साइबर थाने जाने की सलाह दी गई है। तमिलानाडु से आया बैंक खाते फ्रीज करने का निर्देश तमिलनाडु वाणिज्यिक कर विभाग के कृष्णगिरी-2 असेसेमेंट सर्किल के सहायक आयुक्त की ओर से 5 मई 2026 को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के अनुसार, श्री शिवम एक्सपोट्‌र्स नाम की फर्म पर वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 की अवधि का कुल 6 करोड़ 78 लाख 97 हजार 357 रुपए का टैक्स बकाया है। यह रिकवरी नोटिस जीएसटी और पैन नंबर के आधार पर जारी कर बैंकों को जितेंद्र कुमार के खातों, एफडी और ओवरड्राफ्ट अकाउंट को तुरंत फ्रीज करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह ने पीड़ित के पैन कार्ड और पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर तमिलनाडु के कृष्णगिरी के एड्रेस पर फर्जी फर्म खड़ी कर दी। पिता की मौत के बाद लोन के लिए डॉक्यूमेंट दिए थे पीड़ित का कहना है कि मैंने कभी किसी को कंपनी बनाने के लिए दस्तावेज नहीं दिए। आशंका है कि किसी फाइनेंस कंपनी से डेटा लीक हुआ है। जितेंद्र ने बताया कि साल 2017 में पिता की डेथ हो गई थी। 2018 में मैंने लोन लेने के लिए बाड़मेर की एक फाइनेंस कंपनी के एग्जीक्यूटिव को डॉक्यूमेंट दिए थे। इस दौरान उन्होंने सिबिल चेक करने के लिए ओटीपी भी लिया था। मुझे अंदेशा है कि इस दौरान ही मेरा साथ फ्रॉड हुआ है। फरवरी में पीएम आवास मिला, अब कमरा बनवा रहे जितेंद्र ने बताया- फरवरी में प्रधानमंत्री आवास मिला था। पहली किस्त आई तो अपने कच्चे मकान को तोड़ दिया। इन पैसों से कमरा तैयार करवा रहे हैं। मेरा परिवार अभी छोटे भाई के घर में रह रहा है। परिवार में पत्नी, बेटा-बेटी और मां साथ में रहते हैं। जितेंद्र कुमार का कहना है कि मैं दिन-रात मेहनत करके जूती बनाता हूं और मुश्किल से 10-15 हजार रुपए महीना कमा पाता हूं। मेरा तमिलनाडु या किसी एक्सपोर्ट कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है। पीड़ित दर्ज कराए एफआईआर, मदद होगी असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (ACTO) बिहारीलाल ने बताया- यह मामला दूसरे राज्य में पैन कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनी बनाने का हो सकता है। पीड़ित की ओर से नोटिस उपलब्ध कराने पर स्थानीय कर विभाग यह पता लगाने में मदद करेगा कि रजिस्ट्रेशन के समय कौन से मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और दस्तावेज दिए गए थे। बिहारीलाल ने कहा कि पीड़ित को घबराने की जरूरत नहीं है। वह तुंरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं। जालसाज अक्सर लोन और सरकारी स्कीम के नाम पर गरीबों के दस्तावेज हथिया कर फर्जी फर्म और बैंक खाते ऑपरेट करते हैं। इनपुट : रमेश गौड़ … यह खबर भी पढ़ें… प्रेस वाले के नाम पर 598 करोड़ के डायमंड खरीदे-बेचे:इनकम टैक्स नोटिस में खुलासा, बैंक मैनेजर की मिलीभगत की आशंका अजमेर में सड़क किनारे प्रेस करने वाले से इनकम टैक्स ने 598 करोड़ से ज्यादा के लेन-देन का हिसाब मांगा है। नोटिस मिलने के बाद से प्रेस वाला डरा हुआ है। (पूरी खबर पढ़ें)