बारां में जिला प्रशासन के 'मिशन समर्थ्या' ने सहरिया आदिवासी महिलाओं की किस्मत बदल दी है। पहले 200 रुपए रोज कमाने वाली महिलाएं अब हर महीने 8 से 10 हजार रुपए कमा रही हैं। शाहबाद-किशनगंज क्षेत्र की 1000 से ज्यादा महिलाएं 3.08 करोड़ रुपए के सरकारी ऑर्डर संभाल रही हैं। खुशालपुरा गांव की रामकन्या सहरिया इसका एक उदाहरण हैं। पहले जंगल पर निर्भर रहने वाली रामकन्या अब हल्दी पैक कर रही हैं। पहले वन धन केंद्र थे, पर बिजनेस मॉडल नहीं होने से महिलाएं कच्चा माल सस्ते में बेचती थीं। जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा ने सरकारी व्यवस्था में ही इसका हल निकाला। उन्होंने मिड-डे मील और अन्य सरकारी केंद्रों में मसालों की मासिक मांग को सहरिया महिलाओं से जोड़ा। 6 महीने पहले शुरू हुए इस मिशन के तहत 18 वन धन केंद्रों पर पैकेजिंग मशीनें लगाई गईं। अब तक 76.07 लाख रुपए की बिक्री हुई है, सालाना 8.63 करोड़ रुपए का स्थायी बाजार मिला है।